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लॉरेंस कोहलबर्ग के जीवनी एवं सिधांत प्रश्न - उत्तर |

लॉरेंस कोहलबर्ग के जीवनी एवं सिधांत

EXAM NAME CTET
TOPIC कोहलबर्ग के जीवनी एवं सिधांत प्रश्न -उत्तर 
EXAM DATE 8 FEB 2026
OFFICIAL WEBSITE https://ctet.nic.in/
OTHER WEBSITE VVI NOTES

AB JANKARI के इस  पेज में CTET EXAM  के लिए कोहलबर्ग के  जीवनी और सिद्धांत से सम्बन्धित प्रश्न - उत्तर दिया गया है , जो CTET EXAM में पूछे जा सकते है |

Keywords to Include: - कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत एवं जीवनी हिंदी में। लॉरेंस कोहलबर्ग के 3 स्तर, 6 चरण, उदाहरण, विशेषताएँ, सीमाएँ व शैक्षिक महत्व – CTET, TET, B.Ed परीक्षा हेतु उपयोगी नोट्स।

प्रश्न 1: कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में कुल कितने स्तर होते हैं?
उत्तर: तीन स्तर (पूर्व-पारंपरिक, पारंपरिक, उत्तर-पारंपरिक)।

प्रश्न 2: पूर्व-पारंपरिक स्तर पर नैतिक निर्णय किस पर आधारित होते हैं?
उत्तर: दंड, पुरस्कार और स्व-हित पर।

प्रश्न 3: कोहलबर्ग ने अपना सिद्धांत विकसित करने के लिए किस प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक के कार्य को आगे बढ़ाया?
उत्तर: जीन पियाजे के कार्य को।

प्रश्न 4: कोहलबर्ग ने नैतिक तर्क का अध्ययन करने के लिए किस मुख्य विधि का इस्तेमाल किया?
उत्तर: नैतिक दुविधा कहानियों (जैसे हाइंज की दुविधा) का।

प्रश्न 5: नैतिक विकास का वह स्तर कौन सा है जहाँ व्यक्ति सामाजिक अपेक्षाओं और कानून के अनुरूप व्यवहार करता है?
उत्तर: पारंपरिक स्तर।

प्रश्न 6: कोहलबर्ग के अनुसार, किस नैतिक स्तर तक पहुँचने वाले वयस्कों का प्रतिशत सबसे कम है?
उत्तर: उत्तर-पारंपरिक स्तर।

प्रश्न 7: "आज्ञा और दंड" अभिविन्यास नैतिक विकास के किस स्तर व चरण से संबंधित है?
उत्तर: पूर्व-पारंपरिक स्तर, चरण 1 से।

प्रश्न 8: "सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार" का विचार किस चरण की पहचान है?
उत्तर: उत्तर-पारंपरिक स्तर के चरण 5 की।

प्रश्न 9: लॉरेंस कोहलबर्ग ने अधिकांश अपना शोध एवं अध्यापन कार्य किस विश्वविद्यालय में किया?
उत्तर: हार्वर्ड विश्वविद्यालय में।

प्रश्न 10: कोहलबर्ग के सिद्धांत की एक प्रमुख आलोचना क्या है?
उत्तर: यह अत्यधिक "तर्क" पर केंद्रित है और "देखभाल की नैतिकता" को कम आंकता है।

प्रश्न 11: कोहलबर्ग के सिद्धांत में पारंपरिक स्तर को किस आयु वर्ग से जोड़ा जाता है?
उत्तर: किशोरावस्था और अधिकांश वयस्कों से।

प्रश्न 12: चरण 2 'स्वार्थ और विनिमय' में नैतिकता किस सिद्धांत पर आधारित होती है?
उत्तर: "तुम मेरी मदद करो, मैं तुम्हारी मदद करूँगा" के सौदेबाजी वाले सिद्धांत पर।

प्रश्न 13: नैतिक विकास के किस चरण में व्यक्ति 'अच्छा लड़का/अच्छी लड़की' बनने की कोशिश करता है?
उत्तर: पारंपरिक स्तर के चरण 3 (अच्छे अंतर-वैयक्तिक संबंध) में।

प्रश्न 14: कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?
उत्तर: निर्णय के पीछे का 'तर्क', न कि निर्णय स्वयं।

प्रश्न 15: चरण 4 'सामाजिक व्यवस्था और कानून' में व्यक्ति कानून का पालन क्यों करता है?
उत्तर: समाज का सुचारू संचालन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए।

प्रश्न 16: कोहलबर्ग के सिद्धांत का छठा और अंतिम चरण क्या कहलाता है?
उत्तर: चरण 6: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत।

प्रश्न 17: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों का उदाहरण दें।
उत्तर: न्याय, समानता, और मानव अधिकारों के सिद्धांत।

प्रश्न 18: किस चरण में व्यक्ति मानता है कि एक अन्यायपूर्ण कानून को तोड़ना उचित हो सकता है?
उत्तर: उत्तर-पारंपरिक स्तर के चरण 5 और 6 में।

प्रश्न 19: कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास के चरणों के आगे बढ़ने के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर: संज्ञानात्मक परिपक्वता और सामाजिक अनुभव/परस्पर क्रिया।

प्रश्न 20: कोहलबर्ग की प्रसिद्ध 'हाइंज की दुविधा' किस बारे में है?
उत्तर: एक व्यक्ति जो अपनी बीमार पत्नी के लिए महँगी दवाई चोरी करना चाहता है।

प्रश्न 21: पूर्व-पारंपरिक स्तर की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर: स्व-केंद्रित दृष्टिकोण, जहाँ व्यक्ति नियमों को दंड या स्वार्थ से जोड़कर देखता है।

प्रश्न 22: पारंपरिक स्तर की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर: समूह-केंद्रित दृष्टिकोण, जहाँ व्यक्ति सामाजिक अपेक्षाओं, रिश्तों और कानून का पालन करता है।

प्रश्न 23: उत्तर-पारंपरिक स्तर की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर: सिद्धांत-केंद्रित दृष्टिकोण, जहाँ व्यक्ति आंतरिक रूप से चुने गए सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों का पालन करता है।

प्रश्न 24: चरण 1 में, बच्चा एक कार्य को 'गलत' क्यों मानता है?
उत्तर: केवल इसलिए क्योंकि उस कार्य के लिए दंड मिलता है।

प्रश्न 25: "मैंने उसकी मदद की क्योंकि अगली बार मुझे उसकी जरूरत पड़ सकती है" - यह कथन किस चरण को दर्शाता है?
उत्तर: पूर्व-पारंपरिक स्तर के चरण 2 (स्वार्थ और विनिमय) को।

प्रश्न 26: "मैं झूठ नहीं बोलूंगा क्योंकि मेरे माता-पिता ने मुझे ऐसा करने के लिए मना किया है" - यह किस चरण का उदाहरण है?
उत्तर: पूर्व-पारंपरिक स्तर के चरण 1 (आज्ञा और दंड) का।

प्रश्न 27: "मैं चोरी नहीं करूंगा क्योंकि अगर सब चोरी करने लगे तो समाज टूट जाएगा" - यह तर्क किस चरण का है?
उत्तर: पारंपरिक स्तर के चरण 4 (सामाजिक व्यवस्था) का।

प्रश्न 28: "मैं इस अन्यायपूर्ण कानून का विरोध करूंगा भले ही मुझे जेल जाना पड़े" - यह दृष्टिकोण किस चरण से मेल खाता है?
उत्तर: उत्तर-पारंपरिक स्तर के चरण 6 (सार्वभौमिक सिद्धांत) से।

प्रश्न 29: नैतिक विकास के चरणों का क्रम कैसा होता है?
उत्तर: यह एक अपरिवर्तनीय, क्रमिक और सार्वभौमिक क्रम होता है।

प्रश्न 30: क्या कोई व्यक्ति एक चरण को छोड़कर अगले चरण में जा सकता है?
उत्तर: नहीं, चरणों में क्रमिक प्रगति होती है, कोई चरण छूटता नहीं है।

प्रश्न 31: कोहलबर्ग के सिद्धांत को किस प्रकार के अध्ययनों से मजबूती मिली?
उत्तर: अनुदैर्ध्य अध्ययनों से, जिनमें एक ही समूह का वर्षों तक अध्ययन किया गया।

प्रश्न 32: नैतिक तर्क और नैतिक व्यवहार में क्या अंतर है?
उत्तर: नैतिक तर्क सोचने की प्रक्रिया है, जबकि नैतिक व्यवहार वह कार्य है जो व्यक्ति वास्तव में करता है।

प्रश्न 33: शिक्षा के क्षेत्र में कोहलबर्ग के सिद्धांत का क्या उपयोग है?
उत्तर: यह शिक्षकों को बच्चों की नैतिक समझ के स्तर के अनुरूप नैतिक चर्चाएँ और गतिविधियाँ डिजाइन करने में मदद करता है।

प्रश्न 34: पियाजे के 'बाह्य-नियंत्रित' नैतिकता चरण का कोहलबर्ग के किस चरण से सम्बन्ध है?
उत्तर: कोहलबर्ग के पूर्व-पारंपरिक स्तर (चरण 1 और 2) से।

प्रश्न 35: कैरोल गिलिगन ने कोहलबर्ग के सिद्धांत की किस आधार पर आलोचना की?
उत्तर: यह सिद्धांत पुरुष-केंद्रित है और 'देखभाल व सम्बन्धों की नैतिकता' को नजरअंदाज करता है।

प्रश्न 36: 'लोक-लाज' या 'समाज क्या कहेगा' की चिंता किस चरण में सबसे अधिक होती है?
उत्तर: पारंपरिक स्तर के चरण 3 में।

प्रश्न 37: "कानून सबके हित के लिए होते हैं, इसलिए उनका पालन करना चाहिए" - यह विचार किस चरण का है?
उत्तर: पारंपरिक स्तर के चरण 4 का।

प्रश्न 38: "कुछ कानून अन्यायपूर्ण हो सकते हैं और उन्हें शांतिपूर्ण विरोध द्वारा बदला जा सकता है" - यह किस चरण का दृष्टिकोण है?
उत्तर: उत्तर-पारंपरिक स्तर के चरण 5 (सामाजिक अनुबंध) का।

प्रश्न 39: नैतिक दुविधाओं पर चर्चा करने से छात्रों के नैतिक विकास में कैसे मदद मिलती है?
उत्तर: यह उनके मौजूदा तर्क स्तर को चुनौती देकर अगले उच्च स्तर की ओर सोचने के लिए प्रेरित करती है।

प्रश्न 40: कोहलबर्ग का सिद्धांत किस प्रकार के विकास पर केंद्रित है?
उत्तर: संज्ञानात्मक विकास पर, विशेष रूप से नैतिक तर्क के विकास पर।

प्रश्न 41: पूर्व-पारंपरिक स्तर की आयु सीमा आमतौर पर क्या है?
उत्तर: लगभग 9 वर्ष से कम आयु के बच्चे।

प्रश्न 42: चरण 3 और चरण 4 में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: चरण 3 व्यक्तिगत रिश्तों और स्वीकृति पर केंद्रित है, जबकि चरण 4 व्यापक सामाजिक व्यवस्था और कानून पर।

प्रश्न 43: कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास की प्रक्रिया कब तक चल सकती है?
उत्तर: यह वयस्कता के दौरान भी जारी रह सकती है।

प्रश्न 44: चरण 5 'सामाजिक अनुबंध' में लोकतंत्र को कैसे देखा जाता है?
उत्तर: लोकतंत्र को सबसे अच्छी शासन प्रणाली के रूप में देखा जाता है क्योंकि यह बहुमत के हित में कानून बदलने की अनुमति देता है।

प्रश्न 45: कोहलबर्ग के सिद्धांत की एक कमजोरी यह है कि यह किस पर कम ध्यान देता है?
उत्तर: यह भावनाओं, संवेदनाओं और सांस्कृतिक भिन्नताओं पर कम ध्यान देता है।

प्रश्न 46: शिक्षक द्वारा सजा देने की बजाय नियम तोड़ने के परिणाम समझाना, किस उच्च नैतिक चरण को बढ़ावा दे सकता है?
उत्तर: यह पारंपरिक (चरण 4) और उत्तर-पारंपरिक (चरण 5) स्तर के तर्क को बढ़ावा दे सकता है।

प्रश्न 47: "सभी लोगों के साथ समान और न्यायपूर्ण व्यवहार होना चाहिए" - यह विश्वास किस चरण से जुड़ा है?
उत्तर: उत्तर-पारंपरिक स्तर के चरण 6 से।

प्रश्न 48: चरण 6 की नैतिकता को 'सार्वभौमिक' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि यह व्यक्तिगत हित या सामाजिक समझौते से ऊपर उठकर सभी मनुष्यों पर लागू होने वाले सिद्धांतों पर आधारित है।

प्रश्न 49: कोहलबर्ग के सिद्धांत में, सभी चरणों में समान क्या है?
उत्तर: प्रत्येक चरण में, व्यक्ति किसी स्थिति को 'न्याय' के दृष्टिकोण से देखता है, हालाँकि न्याय की परिभाषा हर चरण में बदलती है।

प्रश्न 50: संज्ञानात्मक विकास और नैतिक विकास का क्या सम्बन्ध है?
उत्तर: उच्च स्तर के नैतिक तर्क के लिए उच्च स्तर की संज्ञानात्मक क्षमता (जैसे अमूर्त सोच) आवश्यक है।

प्रश्न 51: 'हाइंज की दुविधा' में, चरण 1 का तर्क क्या होगा?
उत्तर: हाइंज को दवाई नहीं चोरी करनी चाहिए, क्योंकि अगर पकड़ा गया तो उसे जेल हो जाएगी।

प्रश्न 52: 'हाइंज की दुविधा' में, चरण 2 का संभावित तर्क क्या होगा?
उत्तर: हाइंज दवाई चोरी कर सकता है अगर उसे लगता है कि उसकी पत्नी बाद में उसकी कोई मदद करेगी, या अगर वह पकड़ा नहीं गया तो यह ठीक है।

प्रश्न 53: 'हाइंज की दुविधा' में, चरण 3 का संभावित तर्क क्या होगा?
उत्तर: हाइंज को दवाई चोरी करनी चाहिए क्योंकि एक अच्छा पति अपनी पत्नी की मदद करता है और लोग उसे स्वार्थी नहीं समझेंगे।

प्रश्न 54: 'हाइंज की दुविधा' में, चरण 4 का संभावित तर्क क्या होगा?
उत्तर: हाइंज को दवाई नहीं चोरी करनी चाहिए, भले ही उसकी पत्नी बीमार हो, क्योंकि चोरी करना कानूनन गलत है और अगर सब चोरी करने लगें तो समाज में अराजकता फैल जाएगी।

प्रश्न 55: 'हाइंज की दुविधा' में, चरण 5 का संभावित तर्क क्या होगा?
उत्तर: हाइंज को दवाई चोरी करनी चाहिए क्योंकि एक इंसान का जीवन बचाना, सम्पत्ति के कानून से ज्यादा महत्वपूर्ण है; ऐसे मामलों में कानून को बदलना चाहिए।

प्रश्न 56: 'हाइंज की दुविधा' में, चरण 6 का संभावित तर्क क्या होगा?
उत्तर: जीवन का अधिकार एक सार्वभौमिक अधिकार है; एक इंसान को मरने से बचाने के लिए, दवाई पर दवाई कंपनी के एकाधिकार के मुकाबले, हाइंज का कार्य न्यायसंगत है।

प्रश्न 57: कोहलबर्ग के चरणों में 'न्याय' की अवधारणा कैसे विकसित होती है?
उत्तर: भौतिक परिणामों से (चरण 1) → सौदेबाजी से (चरण 2) → सामाजिक समझौते से (चरण 3 & 4) → सामाजिक अनुबंध से (चरण 5) → सार्वभौमिक सिद्धांतों से (चरण 6)।

प्रश्न 58: क्या कोहलबर्ग के सभी छह चरण हर संस्कृति में पाए जाते हैं?
उत्तर: कोहलबर्ग का दावा था कि चरण सार्वभौमिक हैं, लेकिन कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि उच्च चरण पश्चिमी दर्शन से प्रभावित हो सकते हैं।

प्रश्न 59: नैतिक विकास में पारिवारिक वार्तालाप की क्या भूमिका है?
उत्तर: यह बच्चों को विभिन्न दृष्टिकोण सुनने और अपने तर्क को विकसित करने का अवसर देती है।

प्रश्न 60: 'दंड से बचने' और 'कानून का पालन करने' में क्या मूलभूत अंतर है?
उत्तर: 'दंड से बचना' (चरण 1) स्व-केंद्रित भय है, जबकि 'कानून का पालन' (चरण 4) सामाजिक दायित्व की भावना है।

प्रश्न 61: एक व्यक्ति जो धार्मिक आदेशों को बिना सवाल किए मानता है, वह किस चरण में हो सकता है?
उत्तर: पारंपरिक स्तर के चरण 4 में, अगर वह धर्म को एक सर्वोच्च सामाजिक व्यवस्था मानता है।

प्रश्न 62: शिक्षा मनोविज्ञान में, कोहलबर्ग का सिद्धांत किस अन्य महत्वपूर्ण विकास से जुड़ा है?
उत्तर: यह संज्ञानात्मक विकास (पियाजे) और सामाजिक विकास से गहराई से जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 63: कक्षा में समूह परियोजनाएँ नैतिक विकास में कैसे मदद कर सकती हैं?
उत्तर: ये सहयोग, दूसरे के दृष्टिकोण को समझने और सामूहिक निर्णय लेने का अभ्यास कराती हैं, जो पारंपरिक स्तर को बढ़ावा देती हैं।

प्रश्न 64: चरण 4 का व्यक्ति चरण 6 के व्यक्ति को 'अव्यवहारिक' क्यों समझ सकता है?
उत्तर: क्योंकि चरण 4 का व्यक्ति मानता है कि सामाजिक व्यवस्था सर्वोपरि है, जबकि चरण 6 का व्यक्ति व्यक्तिगत सिद्धांतों के आधार पर उसका विरोध कर सकता है।

प्रश्न 65: नैतिक विकास के उच्च चरणों तक पहुँचना क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
उत्तर: क्योंकि यह अधिक लचीले, न्यायसंगत और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण में योगदान देता है।

प्रश्न 66: कोहलबर्ग का सिद्धांत मुख्य रूप से किस प्रकार की शिक्षा से सम्बद्ध है?
उत्तर: नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण से।

प्रश्न 67: क्या नैतिक विकास स्वतः ही होता है या इसे प्रोत्साहित किया जा सकता है?
उत्तर: यह परिपक्वता के साथ होता है, लेकिन चर्चाओं, दुविधाओं और अनुभवों के माध्यम से इसे प्रोत्साहित किया जा सकता है।

प्रश्न 68: 'सहकर्मी' समूह नैतिक विकास में क्या भूमिका निभाते हैं?
उत्तर: वे बच्चे को अपने परिवार के बाहर के विचारों और नियमों से परिचित कराते हैं, जो पारंपरिक स्तर की ओर बढ़ने में मदद करता है।

प्रश्न 69: एक बच्चा जो सजा के डर से सच बोलता है, वह किस चरण में है?
उत्तर: पूर्व-पारंपरिक स्तर के चरण 1 में।

प्रश्न 70: वही बच्चा जब किशोर होकर सच बोलता है क्योंकि 'ईमानदारी अच्छी नीति है', तो वह किस चरण की ओर बढ़ रहा है?
उत्तर: पारंपरिक स्तर के चरण 3 या 4 की ओर।

प्रश्न 71: नैतिक विकास के अध्ययन के लिए कोहलबर्ग ने किस आयु के प्रतिभागियों का चयन किया था?
उत्तर: उन्होंने अपना प्रसिद्ध 20-वर्षीय अनुदैर्ध्य अध्ययन 10 से 16 वर्ष की आयु के लड़कों से शुरू किया था।

प्रश्न 72: कोहलबर्ग के सिद्धांत ने शिक्षण पद्धति को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर: इसने 'नैतिक चर्चा कक्षा' और 'न्याय समुदाय' जैसी अवधारणाओं को जन्म दिया, जहाँ छात्र नैतिक मुद्दों पर बहस करते हैं।

प्रश्न 73: 'न्याय समुदाय' का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह एक ऐसा स्कूल या कक्षा वातावरण है जहाँ छात्र नियम बनाने और न्यायिक मामलों को सुलझाने में सक्रिय भागीदारी करते हैं।

प्रश्न 74: कोहलबर्ग के सिद्धांत में 'चरण' शब्द क्या दर्शाता है?
उत्तर: यह दर्शाता है कि नैतिक विकास अलग-अलग, गुणात्मक रूप से भिन्न सोचने के तरीकों के एक निश्चित क्रम में होता है।

प्रश्न 75: क्या नैतिक विकास का संबंध बुद्धि से है?
उत्तर: एक निश्चित सीमा तक हाँ, क्योंकि उच्च चरणों के लिए अमूर्त सोच की क्षमता चाहिए, लेकिन उच्च बुद्धि उच्च नैतिक चरण की गारंटी नहीं है।

प्रश्न 76: अधिकांश वयस्क किस नैतिक स्तर पर पाए जाते हैं?
उत्तर: शोध के अनुसार, अधिकांश वयस्क पारंपरिक स्तर (चरण 3 और 4) पर होते हैं।

प्रश्न 77: क्या एक व्यक्ति विभिन्न स्थितियों में अलग-अलग चरणों का प्रदर्शन कर सकता है?
उत्तर: आमतौर पर, एक व्यक्ति एक प्रमुख चरण में होता है, लेकिन वह आस-पास के चरणों के तर्क भी इस्तेमाल कर सकता है।

प्रश्न 78: 'सामाजिक अनुबंध' (चरण 5) की अवधारणा किस दार्शनिक से प्रभावित है?
उत्तर: जीन-जैक्स रूसो और जॉन लॉक जैसे दार्शनिकों के विचारों से।

प्रश्न 79: 'सार्वभौमिक सिद्धांत' (चरण 6) की अवधारणा किस दार्शनिक से प्रभावित है?
उत्तर: इमैनुएल कांट के दर्शन से, विशेष रूप से उनके 'कैटेगोरिकल इम्परेटिव' से।

प्रश्न 80: कोहलबर्ग की मृत्यु कैसे हुई?
उत्तर: लंबे समय तक एक दुर्बल करने वाली बीमारी से पीड़ित होने के बाद, उन्होंने 1987 में आत्महत्या कर ली।

प्रश्न 81: कोहलबर्ग के काम ने अन्य किस प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक को प्रभावित किया?
उत्तर: उनके सहयोगी और आलोचक कैरोल गिलिगन को, जिन्होंने 'देखभाल की नैतिकता' का सिद्धांत दिया।

प्रश्न 82: गिलिगन के अनुसार, कोहलबर्ग का सिद्धांत किस लिंग के नमूनों पर आधारित था?
उत्तर: केवल पुरुष नमूनों पर, इसलिए यह पुरुषों के 'न्याय' आधारित नैतिकता को दर्शाता है।

प्रश्न 83: गिलिगन ने 'देखभाल की नैतिकता' के कौन से स्तर बताए?
उत्तर: 1. व्यक्तिगत अस्तित्व (स्वयं पर ध्यान) 2. दूसरों की देखभाल (अच्छाई की भावना) 3. स्वयं और दूसरों की देखभाल (गैर-हिंसा का सिद्धांत)।

प्रश्न 84: कोहलबर्ग के सिद्धांत की एक ताकत क्या है?
उत्तर: इसने नैतिक विकास को वैज्ञानिक अध्ययन और चर्चा का विषय बनाया और शिक्षा पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ा।

प्रश्न 85: नैतिक निर्णय लेने में 'भावना' की भूमिका के बारे में कोहलबर्ग का क्या विचार था?
उत्तर: वे मानते थे कि नैतिक विकास मुख्य रूप से संज्ञानात्मक तर्क का विषय है, भावना गौण है।

प्रश्न 86: आधुनिक शोध कोहलबर्ग के इस दृष्टिकोण से कहाँ तक सहमत है?
उत्तर: आधुनिक तंत्रिका विज्ञान दर्शाता है कि नैतिक निर्णय में तर्क और भावना दोनों की जटिल भूमिका होती है।

प्रश्न 87: क्या कोहलबर्ग का सिद्धांत व्यवहारवाद के विरुद्ध था?
उत्तर: हाँ, क्योंकि यह बाहरी पुरस्कार-दंड (व्यवहारवाद) के बजाय आंतरिक संज्ञानात्मक संरचनाओं के विकास पर जोर देता है।

प्रश्न 88: शिक्षा मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में कोहलबर्ग का सिद्धांत किस अध्याय के तहत आता है?
उत्तर: आमतौर पर 'संज्ञानात्मक विकास', 'सामाजिक-नैतिक विकास' या 'विकासात्मक मनोविज्ञान' के अध्याय में।

प्रश्न 89: नैतिक विकास के चरणों को समझना एक शिक्षक के लिए क्यों उपयोगी है?
उत्तर: इससे शिक्षक को यह समझने में मदद मिलती है कि कोई छात्र अनुशासनहीनता या नैतिक संघर्ष को क्यों और कैसे देख रहा है, और उचित प्रतिक्रिया दे सकता है।

प्रश्न 90: एक प्रीस्कूल शिक्षक को अपने छात्रों में किस नैतिक चरण की उम्मीद करनी चाहिए?
उत्तर: पूर्व-पारंपरिक स्तर (चरण 1 और 2) की।

प्रश्न 91: कक्षा के नियम बनाते समय छात्रों को शामिल करना किस उच्च नैतिक सोच को बढ़ावा देता है?
उत्तर: यह चरण 5 की 'सामाजिक अनुबंध' की समझ को बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि छात्र देखते हैं कि नियम उनके अपने समझौते से बनते हैं।

प्रश्न 92: कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास की दिशा क्या है?
उत्तर: स्व-केंद्रितता से समाज-केंद्रितता और फिर सिद्धांत-केंद्रितता की ओर।

प्रश्न 93: क्या कोहलबर्ग के चरणों में 'धर्म' या 'आध्यात्मिकता' के लिए कोई विशेष स्थान है?
उत्तर: सीधे तौर पर नहीं। धार्मिक नियमों का पालन चरण 4 में आ सकता है, और सार्वभौमिक प्रेम जैसे आध्यात्मिक सिद्धांत चरण 6 में आ सकते हैं।

प्रश्न 94: नैतिक विकास और सामाजिक अध्ययन (इतिहास, नागरिक शास्त्र) की शिक्षा का क्या सम्बन्ध है?
उत्तर: इतिहास में नैतिक दुविधाएँ और नागरिक शास्त्र में कानून व अधिकारों की चर्चा, नैतिक तर्क को विकसित करने के शक्तिशाली अवसर प्रदान करते हैं।

प्रश्न 95: 'विचार-विमर्श' (Deliberation) नैतिक विकास में क्या भूमिका निभाता है?
उत्तर: यह व्यक्ति को अपने तर्क को संगठित करने, दूसरे का पक्ष सुनने और अपने विचारों को परिष्कृत करने का मौका देता है।

प्रश्न 96: नैतिक नेता बनने के लिए किस नैतिक स्तर का होना आवश्यक नहीं है लेकिन फायदेमंद है?
उत्तर: उत्तर-पारंपरिक स्तर (चरण 5-6) का होना, क्योंकि यह नेता को स्थापित व्यवस्था से ऊपर उठकर सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।

प्रश्न 97: कोहलबर्ग के सिद्धांत का 'मानवतावादी मनोविज्ञान' से क्या संबंध है?
उत्तर: यह मानव की बुद्धिमत्ता और उच्चतर मूल्यों की ओर विकसित होने की क्षमता में विश्वास रखता है, जो मानवतावादी दृष्टिकोण से मेल खाता है।

प्रश्न 98: आप किसी व्यक्ति के नैतिक चरण का आकलन कैसे कर सकते हैं?
उत्तर: उनसे एक नैतिक दुविधा के बारे में पूछकर और इस पर ध्यान देकर कि वे अपने निर्णय का समर्थन करने के लिए किस प्रकार का 'तर्क' देते हैं।

प्रश्न 99: नैतिक विकास का अध्ययन करने वाला कोहलबर्ग का मुख्य ग्रंथ कौन सा है?
उत्तर: उनके लेखों का संग्रह "द फिलॉसफी ऑफ़ मोरल डेवलपमेंट" (द मोरल स्टेजेज: द कोग्निटिव-डेवलपमेंटल अप्रोच)।

प्रश्न 100: कोहलबर्ग के काम का शिक्षा मनोविज्ञान में समग्र योगदान क्या है?
उत्तर: इसने यह समझ प्रदान की कि बच्चे की नैतिकता केवल बाहरी नियमों को सीखना नहीं है, बल्कि न्याय और समाज के बारे में सोचने की एक आंतरिक संज्ञानात्मक प्रक्रिया का विकास है, जिसे शिक्षा द्वारा सकारात्मक रूप से आकार दिया जा सकता है।

प्रश्न 101: कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत का शिक्षण में सबसे प्रत्यक्ष अनुप्रयोग क्या है?
उत्तर: 'नैतिक चर्चा कक्षाएँ' आयोजित करना, जहाँ छात्र वास्तविक जीवन की नैतिक दुविधाओं पर तर्क करते हैं।

प्रश्न 102: कोहलबर्ग का सिद्धांत 'विकासात्मक' क्यों कहलाता है?
उत्तर: क्योंकि यह दर्शाता है कि नैतिक सोच जन्मजात नहीं बल्कि एक निश्चित, क्रमिक क्रम में परिपक्वता के साथ विकसित होती है।

प्रश्न 103: 'हाइंज की दुविधा' के अलावा कोहलबर्ग ने और किस प्रसिद्ध दुविधा का उपयोग किया?
उत्तर: उन्होंने 'जो की दुविधा' (जो का पिता उससे वादा तोड़ने के लिए कहता है) जैसी अन्य कहानियों का भी प्रयोग किया।

प्रश्न 104: कोहलबर्ग ने अपने शोध में प्रतिभागियों से सिर्फ एक सही उत्तर मांगा या कुछ और?
उत्तर: नहीं, उन्होंने एक 'सही' उत्तर नहीं मांगा; उनकी रुचि प्रतिभागी के निर्णय के **पीछे के तर्क** को समझने में थी।

प्रश्न 105: क्या नैतिक विकास के सभी चरणों से गुजरना अनिवार्य है?
उत्तर: कोहलबर्ग के अनुसार हाँ, क्रम तय है, लेकिन हर कोई अंतिम चरण तक नहीं पहुँच पाता।

प्रश्न 106: सांस्कृतिक मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से कोहलबर्ग के सिद्धांत की क्या सीमा है?
उत्तर: यह पश्चिमी, शिक्षित, औद्योगिक समाजों के व्यक्तिवादी और न्याय-केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दे सकता है, जबकि सामूहिक समाज 'सामंजस्य' या 'समुदाय के हित' को अधिक महत्व देते हैं।

प्रश्न 107: कोहलबर्ग के सिद्धांत ने 'अपराध न्याय' प्रणाली को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर: इसने 'दंड' के बजाय 'पुनर्वास' और 'नैतिक पुनर्शिक्षा' पर जोर देने वाले दृष्टिकोण को बल दिया, विशेषकर किशोर अपराधियों के लिए।

प्रश्न 108: कोहलबर्ग के 'चरण 6' को बाद के शोध में क्यों चुनौती दी गई?
उत्तर: क्योंकि बहुत कम लोग इस स्तर के तर्क का सुसंगत रूप से प्रदर्शन करते थे, और यह चरण उनके स्वयं के 'चरण 5' से स्पष्ट रूप से अलग नहीं था।

प्रश्न 109: शिक्षक, छात्र के वर्तमान नैतिक चरण से एक चरण ऊपर के तर्क पेश करके क्या कर सकते हैं?
उत्तर: यह 'संज्ञानात्मक असंतुलन' पैदा कर सकता है, जो छात्र को अपनी सोच को पुनर्गठित करने और अगले चरण की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।

प्रश्न 110: नैतिक विकास में 'रोल-प्ले' (भूमिका निर्वाह) की क्या उपयोगिता है?
उत्तर: यह छात्रों को किसी दुविधा में अलग-अलग पात्रों के दृष्टिकोण को समझने में मदद करती है, जो 'दूसरे का नजरिया अपनाने' की क्षमता (चरण 3 की मुख्य विशेषता) विकसित करती है।

प्रश्न 111: कोहलबर्ग के सिद्धांत और 'लोकतांत्रिक नागरिकता शिक्षा' का क्या संबंध है?
उत्तर: यह सिद्धांत इस विचार का आधार है कि अच्छे नागरिक बनने के लिए केवल नियम जानना काफी नहीं है, बल्कि सामाजिक नियमों और सिद्धांतों के पीछे के तर्क को समझना आवश्यक है।

प्रश्न 112: 'प्रो-सोशल बिहेवियर' (सहसामाजिक व्यवहार) का कोहलबर्ग के सिद्धांत से क्या संबंध है?
उत्तर: उच्च नैतिक चरणों पर, सहसामाजिक व्यवहार (दूसरों की मदद करना) स्वार्थ या स्वीकृति पाने के बजाय न्याय या सार्वभौमिक सिद्धांतों से प्रेरित होता है।

प्रश्न 113: क्या एक छोटा बच्चा कभी उच्च नैतिक चरण जैसा व्यवहार दिखा सकता है?
उत्तर: व्यवहार दिखा सकता है (जैसे साझा करना), लेकिन उसके पीछे का तर्क निम्न चरण का होगा (जैसे, "मम्मी ने कहा तो" या "वह मुझे अपना खिलौना देगा")।

प्रश्न 114: कोहलबर्ग के सिद्धांत ने व्यवसायिक नैतिकता (बिजनेस एथिक्स) के शिक्षण को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर: इसने केस स्टडी और नैतिक दुविधाओं पर चर्चा को व्यवसायिक नैतिकता पाठ्यक्रम का केंद्र बना दिया, ताकि प्रबंधकों के नैतिक तर्क कौशल विकसित हों।

प्रश्न 115: 'नैतिक शिक्षा' के संदर्भ में कोहलबर्ग 'चरित्र शिक्षा' से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर: चरित्र शिक्षा अक्सर विशिष्ट मूल्यों (ईमानदारी, सम्मान) को सीधे सिखाने पर जोर देती है, जबकि कोहलबर्ग नैतिक समस्याओं पर **सोचने की क्षमता** विकसित करने पर जोर देते हैं।

प्रश्न 116: कोहलबर्ग की मान्यता के अनुसार, एक व्यक्ति का नैतिक चरण कैसे निर्धारित होता है?
उत्तर: उनके द्वारा प्रस्तुत किए जा सकने वाले **सबसे उन्नत तर्क** के आधार पर, बशर्ते वह तर्क सुसंगत और समझ में आने वाला हो।

प्रश्न 117: नैतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पारिवारिक वातावरण कैसा होना चाहिए?
उत्तर: ऐसा वातावरण जहाँ बच्चे की राय सुनी जाए, उससे तर्कपूर्ण चर्चा हो, और नियमों के पीछे के कारण समझाए जाएँ।

प्रश्न 118: क्या कोहलबर्ग का सिद्धांत 'नास्तिक' या 'धर्मनिरपेक्ष' है?
उत्तर: जरूरी नहीं। यह नैतिकता के स्रोत के रूप में 'दैवीय आदेश' पर केंद्रित नहीं है, बल्कि मानवीय तर्क पर है। एक धार्मिक व्यक्ति भी उच्च चरणों पर पहुँच सकता है अगर उसके धार्मिक सिद्धांत सार्वभौमिक न्याय पर आधारित हैं।

प्रश्न 119: आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञान में कोहलबर्ग का स्थान क्या है?
उत्तर: वे एक **मूलभूत सिद्धांतकार** हैं जिनका काम अभी भी नैतिक और सामाजिक-संवेगात्मक शिक्षण के लिए एक संदर्भ बिंदु प्रदान करता है, भले ही उसे संशोधित और विस्तारित किया गया हो।

प्रश्न 120: कोहलबर्ग के काम से हमारी 'मानव प्रकृति' के बारे में क्या समझ मिलती है?
उत्तर: यह सुझाव देता है कि मनुष्य स्वभाव से नैतिक प्राणी हैं जो न्याय और व्यवस्था की तलाश करते हैं, और हमारी नैतिक समझ अनुभव और चिंतन के माध्यम से विकसित होने की क्षमता रखती है।


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