Type Here to Get Search Results !

जीन पियाजे जीवनी और सिद्धांत | Jean Piaget biography and theory in hindi

जीन पियाजे जीवनी और सिद्धांत

 
EXAM NAME CTET
TOPIC जीन पियाजे जीवनी और सिद्धांत
EXAM DATE 8 FEB 2026
OFFICIAL WEBSITE https://ctet.nic.in/
OTHER WEBSITE VVI NOTES

AB JANKARI के इस  पेज में CTET EXAM  के लिए जीन पियाजे जीवनी और सिद्धांत से सम्बन्धित जानकारी दिया गया है , जो CTET के परीक्षा में पूछे जा सकते है |

Keywords to Include: - जीन पियाजे, संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत, CTET परीक्षा तैयारी, बाल विकास और शिक्षाशास्त्र, पियाजे के 4 चरण, संवेदी-गामक अवस्था, मूर्त संक्रियात्मक अवस्था


जीन पियाजे जीवनी

  • पूरा नाम: जीन विलियम फ़्रिट्ज़ पियाजे
  • पिता: आर्थर पियाजे (मध्ययुगीन साहित्य के प्रोफेसर)
  • माता: रेबेका जैक्सन
  • जन्म: 9 अगस्त, 1896 (स्विट्ज़रलैंड)
  • मृत्यु: 16 सितंबर, 1980
  • पेशा: मनोवैज्ञानिक, शिक्षाशास्त्री
  • मुख्य योगदान: बाल विकास के सिद्धांत, संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत
  • प्रसिद्ध पुस्तक: "द लैंग्वेज एंड थॉट ऑफ द चाइल्ड" (1923)
  •  प्रारंभिक रुचि: जीवविज्ञान (10 वर्ष की आयु में ही वैज्ञानिक पत्र प्रकाशित)
  • शिक्षा: न्यूशैटल विश्वविद्यालय से प्राणिशास्त्र में डॉक्टरेट (1918)
  • बाद के अध्ययन: ज्यूरिख में मनोविज्ञान और मनोरोग का अध्ययन

जीन पियाजे का प्रमुख किताबे 

  1. "द लैंग्वेज एंड थॉट ऑफ द चाइल्ड" (1923)
  2. "द चाइल्ड्स कन्सेप्शन ऑफ द वर्ल्ड" (1926)
  3. "द मोरल जजमेंट ऑफ द चाइल्ड" (1932)


पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत

पियाजे के अनुसार बच्चे सक्रिय रूप से अपने पर्यावरण से अंत:क्रिया करके ज्ञान का निर्माण करते हैं।

1. संज्ञानात्मक विकास के चार चरण:


क) संवेदी-गामक अवस्था (Sensorimotor Stage)
ख) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage)
ग) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage)
घ) औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage)


क) संवेदी-गामक अवस्था (Sensorimotor Stage)
  • आयु: जन्म से 2 वर्ष
विशेषताएँ:
  • इंद्रियों और क्रियाओं के माध्यम से दुनिया को समझना
  • वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) का विकास
  • प्रतिवर्ती क्रियाओं का आभाव 

ख) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage)

  • आयु: 2 से 7 वर्ष
विशेषताएँ:
  • प्रतीकात्मक चिंतन का विकास
  • अहंकेंद्रिता (Egocentrism)
  • जीववाद (Animism)
  • संरक्षण (Conservation) की अवधारणा का अभाव
ग) मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage)
  • आयु: 7 से 11 वर्ष
विशेषताएँ:
  • तार्किक चिंतन का विकास (मूर्त वस्तुओं के संदर्भ में)
  • संरक्षण की अवधारणा का विकास
  • वर्गीकरण और क्रमीकरण की क्षमता
  • प्रतिवर्त्यता (Reversibility) की समझ
घ) औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage)
  • आयु: 11 वर्ष से आगे
विशेषताएँ:
  • अमूर्त और काल्पनिक चिंतन
  • परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क
  • वैज्ञानिक चिंतन का विकास
  • नैतिक और दार्शनिक विषयों पर चिंतन


जीन पियाजे सिद्धांत का आधार

पियाजे का मानना था कि बच्चे छोटे वैज्ञानिक होते हैं जो सक्रिय रूप से अपने पर्यावरण के साथ अंत:क्रिया करके ज्ञान का निर्माण करते हैं।

जीन पियाजे सिद्धांत मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts)

1. स्कीमा (Schema)
मानसिक संरचनाएँ या अवधारणाएँ जो जानकारी को व्यवस्थित करती हैं
उदाहरण: "कु`       त्ता" का स्कीमा - चार पैर, पूँछ, भौंकता है

2. समावेशन (Assimilation)
नई जानकारी को मौजूदा स्कीमा में समायोजित करना
उदाहरण: बच्चा पहली बार बिल्ली देखता है और उसे "कुत्ता" कहता है

3. समायोजन (Accommodation)
मौजूदा स्कीमा को नई जानकारी के अनुसार बदलना
उदाहरण: बच्चा सीखता है कि बिल्ली और कुत्ता अलग हैं

4. संतुलन (Equilibration)

समावेशन और समायोजन के बीच संतुलन बनाने की प्रक्रिया
संज्ञानात्मक संघर्ष को हल करना



पियाजे के सिद्धांत की शिक्षा में उपयोगिता

शिक्षण निहितार्थ:
  • विकासात्मक तैयारी: बच्चे की विकासात्मक अवस्था के अनुसार शिक्षण
  • सक्रिय शिक्षण: बच्चों को सक्रिय रूप से सीखने के अवसर देना
  • खोज-आधारित शिक्षण: बच्चों को स्वयं खोज करने देना
  • सामाजिक अंतःक्रिया: सहपाठियों के साथ अंतःक्रिया को प्रोत्साहन
कक्षा में अनुप्रयोग:
  • प्राथमिक स्तर: मूर्त शिक्षण सामग्री का उपयोग
  • माध्यमिक स्तर: अमूर्त अवधारणाओं की शिक्षा
  • रचनावादी दृष्टिकोण: बच्चे स्वयं ज्ञान का निर्माण करते हैं

जीन पियाजे के सिद्धांत की आलोचनाएँ

सीमाएँ:
  • आयु सीमा: चरणों की आयु सीमा को लेकर कठोरता
  • सांस्कृतिक पक्षपात: पश्चिमी संस्कृति पर केन्द्रित
  • सामाजिक कारकों की उपेक्षा: सामाजिक अंतःक्रिया को कम महत्व
  • अतिसामान्यीकरण: सभी बच्चों को एक जैसा मानना
  • वयस्क संज्ञानात्मक विकास: वयस्क विकास पर कम ध्यान


जीन पियाजे सिद्धांत मुख्य तथ्य

  • पियाजे रचनावादी (Constructivist) दृष्टिकोण के समर्थक थे
  • बच्चे सक्रिय शिक्षार्थी हैं
  • विकास सार्वभौमिक है लेकिन गति भिन्न हो सकती है
  • खेल बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

निष्कर्ष
जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत बाल मनोविज्ञान और शिक्षाशास्त्र में एक मील का पत्थर है। यह सिद्धांत शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि बच्चे कैसे सोचते हैं और सीखते हैं, जिससे अधिक प्रभावी शिक्षण विधियों का विकास हो सकता है। CTET परीक्षा के लिए यह सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बाल विकास की गहन समझ प्रदान करता है।

ऐसे ही और जानकारी के लिए निचे दिए गये लिंक से व्हाट्स एप चैनल + ग्रुप एवं टेलीग्राम ज्वाइन करे |

व्हाट्स एप चैनल Click Here
व्हाट्स एप ग्रुप Click Here
टेलीग्राम चैनल Click Here
फेसबुक पेज Click Here
यू-ट्यूब Click Here
इंस्टाग्राम Click Here

OTHER RELATED LINK-

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad