KOHLBERG MORAL DEVELOPMENT MCQ PRACTICE SET SCORE TEST
कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत PRACTICE SET-01
कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत SCORE TEST-01
कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत
Kohlberg's Theory of Moral Development
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प्रश्न 1. कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
सही उत्तर: (B) नैतिक तर्क एवं निर्णय का विकास।
लॉरेंस कोहलबर्ग ने बताया कि व्यक्ति का नैतिक विकास विभिन्न स्तरों और अवस्थाओं से होकर आगे बढ़ता है। उनका मुख्य ध्यान इस बात पर था कि व्यक्ति किसी कार्य को सही या गलत क्यों मानता है।
लॉरेंस कोहलबर्ग ने बताया कि व्यक्ति का नैतिक विकास विभिन्न स्तरों और अवस्थाओं से होकर आगे बढ़ता है। उनका मुख्य ध्यान इस बात पर था कि व्यक्ति किसी कार्य को सही या गलत क्यों मानता है।
प्रश्न 2. कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को कितने स्तरों में विभाजित किया?
सही उत्तर: (C) तीन स्तर।
कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को पूर्व-परंपरागत, परंपरागत और उत्तर-परंपरागत तीन स्तरों में बाँटा। प्रत्येक स्तर में दो अवस्थाएँ होती हैं।
कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को पूर्व-परंपरागत, परंपरागत और उत्तर-परंपरागत तीन स्तरों में बाँटा। प्रत्येक स्तर में दो अवस्थाएँ होती हैं।
प्रश्न 3. कोहलबर्ग के सिद्धांत में कुल कितनी नैतिक अवस्थाएँ (Stages) हैं?
सही उत्तर: (A) छह।
तीन स्तरों में प्रत्येक के अंतर्गत दो-दो अवस्थाएँ आती हैं। इस प्रकार कोहलबर्ग ने नैतिक विकास की कुल छह अवस्थाओं का वर्णन किया।
तीन स्तरों में प्रत्येक के अंतर्गत दो-दो अवस्थाएँ आती हैं। इस प्रकार कोहलबर्ग ने नैतिक विकास की कुल छह अवस्थाओं का वर्णन किया।
प्रश्न 4. कोहलबर्ग के नैतिक विकास का प्रथम स्तर कौन-सा है?
सही उत्तर: (D) पूर्व-परंपरागत स्तर।
इस स्तर पर व्यक्ति मुख्यतः दंड से बचने और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त करने के आधार पर सही-गलत का निर्णय करता है। यह कोहलबर्ग के नैतिक विकास का पहला स्तर है।
इस स्तर पर व्यक्ति मुख्यतः दंड से बचने और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त करने के आधार पर सही-गलत का निर्णय करता है। यह कोहलबर्ग के नैतिक विकास का पहला स्तर है।
प्रश्न 5. पूर्व-परंपरागत स्तर की प्रथम अवस्था को क्या कहा जाता है?
सही उत्तर: (B) दंड एवं आज्ञापालन अभिविन्यास।
इस अवस्था में बच्चा किसी कार्य को गलत इसलिए मानता है क्योंकि उसके लिए दंड मिल सकता है। नैतिक निर्णय का आधार दंड का भय और प्राधिकारी की आज्ञा होती है।
इस अवस्था में बच्चा किसी कार्य को गलत इसलिए मानता है क्योंकि उसके लिए दंड मिल सकता है। नैतिक निर्णय का आधार दंड का भय और प्राधिकारी की आज्ञा होती है।
प्रश्न 6. यदि बच्चा किसी गलत कार्य को केवल इसलिए नहीं करता क्योंकि उसे सजा मिलने का डर है, तो यह किस अवस्था का उदाहरण है?
सही उत्तर: (C) दंड एवं आज्ञापालन अभिविन्यास।
यह प्रथम अवस्था है। इसमें कार्य की नैतिकता का मूल्यांकन उसके परिणाम, विशेषकर दंड मिलने या न मिलने, के आधार पर किया जाता है।
यह प्रथम अवस्था है। इसमें कार्य की नैतिकता का मूल्यांकन उसके परिणाम, विशेषकर दंड मिलने या न मिलने, के आधार पर किया जाता है।
प्रश्न 7. पूर्व-परंपरागत स्तर की दूसरी अवस्था कौन-सी है?
सही उत्तर: (A) व्यक्तिगत लाभ एवं विनिमय अभिविन्यास।
दूसरी अवस्था में व्यक्ति अपने हित, जरूरत और लाभ को महत्व देता है। वह पारस्परिक लेन-देन या विनिमय के आधार पर निर्णय लेता है। इसे साधनात्मक उद्देश्य एवं विनिमय अवस्था भी कहते हैं।
दूसरी अवस्था में व्यक्ति अपने हित, जरूरत और लाभ को महत्व देता है। वह पारस्परिक लेन-देन या विनिमय के आधार पर निर्णय लेता है। इसे साधनात्मक उद्देश्य एवं विनिमय अवस्था भी कहते हैं।
प्रश्न 8. "तुम मेरी सहायता करो, मैं तुम्हारी सहायता करूँगा" किस नैतिक अवस्था को प्रदर्शित करता है?
सही उत्तर: (D) व्यक्तिगत लाभ एवं विनिमय।
यह कथन पारस्परिक लाभ और लेन-देन की सोच को दर्शाता है। व्यक्ति दूसरों की सहायता इस अपेक्षा से करता है कि बदले में उसे भी लाभ मिलेगा।
यह कथन पारस्परिक लाभ और लेन-देन की सोच को दर्शाता है। व्यक्ति दूसरों की सहायता इस अपेक्षा से करता है कि बदले में उसे भी लाभ मिलेगा।
प्रश्न 9. परंपरागत नैतिक स्तर में व्यक्ति मुख्यतः किसे महत्व देता है?
सही उत्तर: (B) सामाजिक स्वीकृति, नियम एवं व्यवस्था।
परंपरागत स्तर पर व्यक्ति समाज की अपेक्षाओं, दूसरों की स्वीकृति, सामाजिक भूमिकाओं और कानूनों को महत्व देता है।
परंपरागत स्तर पर व्यक्ति समाज की अपेक्षाओं, दूसरों की स्वीकृति, सामाजिक भूमिकाओं और कानूनों को महत्व देता है।
प्रश्न 10. परंपरागत स्तर की तीसरी अवस्था को किस नाम से जाना जाता है?
सही उत्तर: (C) अच्छा बच्चा अभिविन्यास।
तीसरी अवस्था में व्यक्ति दूसरों की स्वीकृति प्राप्त करना चाहता है। वह अच्छा, सहयोगी और विश्वसनीय व्यक्ति बनने तथा दूसरों को प्रसन्न रखने वाले कार्यों को महत्व देता है।
तीसरी अवस्था में व्यक्ति दूसरों की स्वीकृति प्राप्त करना चाहता है। वह अच्छा, सहयोगी और विश्वसनीय व्यक्ति बनने तथा दूसरों को प्रसन्न रखने वाले कार्यों को महत्व देता है।
प्रश्न 11. "लोग मुझे अच्छा समझें और मेरी प्रशंसा करें" यह किस अवस्था का उदाहरण है?
सही उत्तर: (A) अच्छा बच्चा अभिविन्यास।
इस अवस्था में व्यक्ति दूसरों की प्रशंसा, स्वीकृति और अच्छे संबंधों को महत्व देता है। वह ऐसा व्यवहार करना चाहता है जिससे दूसरे उसे अच्छा व्यक्ति समझें।
इस अवस्था में व्यक्ति दूसरों की प्रशंसा, स्वीकृति और अच्छे संबंधों को महत्व देता है। वह ऐसा व्यवहार करना चाहता है जिससे दूसरे उसे अच्छा व्यक्ति समझें।
प्रश्न 12. कोहलबर्ग के परंपरागत स्तर की चौथी अवस्था कौन-सी है?
सही उत्तर: (D) कानून एवं व्यवस्था अभिविन्यास।
चौथी अवस्था में व्यक्ति सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने, कानूनों का पालन करने और अपने कर्तव्यों को पूरा करने को नैतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है।
चौथी अवस्था में व्यक्ति सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने, कानूनों का पालन करने और अपने कर्तव्यों को पूरा करने को नैतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है।
प्रश्न 13. कोई व्यक्ति कहता है कि "समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानूनों का पालन आवश्यक है।" यह किस अवस्था को दर्शाता है?
सही उत्तर: (B) कानून एवं व्यवस्था अभिविन्यास।
इस अवस्था में कानून, कर्तव्य और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना प्रमुख नैतिक आधार होता है। व्यक्ति नियमों के पालन को समाज के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक मानता है।
इस अवस्था में कानून, कर्तव्य और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना प्रमुख नैतिक आधार होता है। व्यक्ति नियमों के पालन को समाज के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक मानता है।
प्रश्न 14. उत्तर-परंपरागत नैतिक स्तर की विशेषता क्या है?
सही उत्तर: (C) सामाजिक नियमों का आलोचनात्मक मूल्यांकन एवं नैतिक सिद्धांत।
उत्तर-परंपरागत स्तर पर व्यक्ति कानूनों और सामाजिक नियमों को मानव अधिकारों, न्याय तथा नैतिक सिद्धांतों के आधार पर परख सकता है।
उत्तर-परंपरागत स्तर पर व्यक्ति कानूनों और सामाजिक नियमों को मानव अधिकारों, न्याय तथा नैतिक सिद्धांतों के आधार पर परख सकता है।
प्रश्न 15. उत्तर-परंपरागत स्तर की पाँचवीं अवस्था का नाम क्या है?
सही उत्तर: (A) सामाजिक अनुबंध एवं व्यक्तिगत अधिकार।
पाँचवीं अवस्था में व्यक्ति समझता है कि कानून और सामाजिक नियम मानव कल्याण के लिए बनाए जाते हैं। आवश्यक होने पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से उनमें परिवर्तन किया जा सकता है।
पाँचवीं अवस्था में व्यक्ति समझता है कि कानून और सामाजिक नियम मानव कल्याण के लिए बनाए जाते हैं। आवश्यक होने पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से उनमें परिवर्तन किया जा सकता है।
प्रश्न 16. कोहलबर्ग की छठी अवस्था किस पर आधारित है?
सही उत्तर: (D) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत।
छठी अवस्था में नैतिक निर्णय न्याय, समानता, मानव गरिमा और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। व्यक्ति अपने विवेक के अनुसार नैतिक निर्णय लेता है।
छठी अवस्था में नैतिक निर्णय न्याय, समानता, मानव गरिमा और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। व्यक्ति अपने विवेक के अनुसार नैतिक निर्णय लेता है।
प्रश्न 17. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत में किस प्रसिद्ध नैतिक दुविधा का प्रयोग किया गया?
सही उत्तर: (B) हाइंज की दुविधा।
हाइंज की दुविधा में एक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को बचाने के लिए महँगी दवा प्राप्त करने हेतु उसे चुराने पर विचार करता है। इस समस्या पर दिए गए तर्कों के माध्यम से नैतिक चिंतन का अध्ययन किया जाता है।
हाइंज की दुविधा में एक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को बचाने के लिए महँगी दवा प्राप्त करने हेतु उसे चुराने पर विचार करता है। इस समस्या पर दिए गए तर्कों के माध्यम से नैतिक चिंतन का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 18. हाइंज की दुविधा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
सही उत्तर: (C) नैतिक तर्क एवं निर्णय के आधारों का अध्ययन करना।
कोहलबर्ग ने दुविधा पर व्यक्ति के उत्तर से अधिक उसके तर्क को महत्व दिया। इससे यह समझने का प्रयास किया गया कि व्यक्ति किसी निर्णय को नैतिक क्यों मानता है।
कोहलबर्ग ने दुविधा पर व्यक्ति के उत्तर से अधिक उसके तर्क को महत्व दिया। इससे यह समझने का प्रयास किया गया कि व्यक्ति किसी निर्णय को नैतिक क्यों मानता है।
प्रश्न 19. कोहलबर्ग के सिद्धांत पर किस मनोवैज्ञानिक के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत का प्रभाव था?
सही उत्तर: (A) जीन पियाजे।
कोहलबर्ग ने पियाजे के संज्ञानात्मक एवं नैतिक विकास संबंधी विचारों को आगे बढ़ाया। उन्होंने नैतिक तर्क के विकास को क्रमिक अवस्थाओं में समझाया।
कोहलबर्ग ने पियाजे के संज्ञानात्मक एवं नैतिक विकास संबंधी विचारों को आगे बढ़ाया। उन्होंने नैतिक तर्क के विकास को क्रमिक अवस्थाओं में समझाया।
प्रश्न 20. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास का अध्ययन करते समय किस बात को अधिक महत्व दिया जाता है?
सही उत्तर: (D) नैतिक निर्णय के पीछे का तर्क।
कोहलबर्ग का मुख्य जोर इस बात पर था कि व्यक्ति किसी निर्णय तक किस प्रकार पहुँचता है। केवल यह जानना पर्याप्त नहीं कि उसने कौन-सा विकल्प चुना।
कोहलबर्ग का मुख्य जोर इस बात पर था कि व्यक्ति किसी निर्णय तक किस प्रकार पहुँचता है। केवल यह जानना पर्याप्त नहीं कि उसने कौन-सा विकल्प चुना।
प्रश्न 21. कोहलबर्ग के सिद्धांत में नैतिक विकास की अवस्थाओं का क्रम कैसा माना गया है?
सही उत्तर: (B) क्रमिक एवं निश्चित अनुक्रम में।
कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक तर्क का विकास क्रमिक अवस्थाओं में होता है। सामान्यतः व्यक्ति एक अवस्था से अगली अवस्था की ओर बढ़ता है, हालांकि सभी व्यक्ति उच्चतम अवस्था तक पहुँचें, यह आवश्यक नहीं है।
कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक तर्क का विकास क्रमिक अवस्थाओं में होता है। सामान्यतः व्यक्ति एक अवस्था से अगली अवस्था की ओर बढ़ता है, हालांकि सभी व्यक्ति उच्चतम अवस्था तक पहुँचें, यह आवश्यक नहीं है।
प्रश्न 22. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत की एक प्रमुख आलोचना किस मनोवैज्ञानिक ने की थी?
सही उत्तर: (C) कैरल गिलिगन।
कैरल गिलिगन ने कोहलबर्ग के सिद्धांत की आलोचना करते हुए देखभाल, संबंधों और जिम्मेदारी पर आधारित नैतिक दृष्टिकोण को महत्व दिया। उन्होंने न्याय-केंद्रित दृष्टिकोण की सीमाओं की ओर ध्यान दिलाया।
कैरल गिलिगन ने कोहलबर्ग के सिद्धांत की आलोचना करते हुए देखभाल, संबंधों और जिम्मेदारी पर आधारित नैतिक दृष्टिकोण को महत्व दिया। उन्होंने न्याय-केंद्रित दृष्टिकोण की सीमाओं की ओर ध्यान दिलाया।
प्रश्न 23. कैरल गिलिगन ने नैतिक विकास के संदर्भ में किस दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया?
सही उत्तर: (A) देखभाल एवं संबंधों का नैतिक दृष्टिकोण।
गिलिगन ने नैतिक निर्णय में देखभाल, पारस्परिक संबंधों और जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण माना। उन्होंने नैतिकता को केवल न्याय और अधिकारों के आधार पर समझने की सीमा बताई।
गिलिगन ने नैतिक निर्णय में देखभाल, पारस्परिक संबंधों और जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण माना। उन्होंने नैतिकता को केवल न्याय और अधिकारों के आधार पर समझने की सीमा बताई।
प्रश्न 24. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कोहलबर्ग के सिद्धांत के संबंध में सही है?
सही उत्तर: (D) नैतिक तर्क का विकास संज्ञानात्मक विकास से जुड़ा है।
कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को संज्ञानात्मक विकास से संबंधित माना। नैतिक समस्याओं पर तर्क करने और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने की क्षमता इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को संज्ञानात्मक विकास से संबंधित माना। नैतिक समस्याओं पर तर्क करने और विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने की क्षमता इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 25. एक विद्यार्थी कहता है, "मैं नियमों का पालन इसलिए करता हूँ क्योंकि इससे समाज में शांति और व्यवस्था बनी रहती है।" यह किस अवस्था का उदाहरण है?
सही उत्तर: (B) कानून एवं व्यवस्था अभिविन्यास।
यह चौथी अवस्था है। इसमें व्यक्ति सामाजिक व्यवस्था, कानून और कर्तव्य को बनाए रखने के लिए नियमों का पालन करता है।
यह चौथी अवस्था है। इसमें व्यक्ति सामाजिक व्यवस्था, कानून और कर्तव्य को बनाए रखने के लिए नियमों का पालन करता है।
प्रश्न 26. कोई नागरिक मानता है कि अन्यायपूर्ण कानून में लोकतांत्रिक तरीके से संशोधन किया जाना चाहिए। यह किस अवस्था को दर्शाता है?
सही उत्तर: (C) सामाजिक अनुबंध एवं व्यक्तिगत अधिकार।
पाँचवीं अवस्था में व्यक्ति समझता है कि कानून मानव कल्याण के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अन्यायपूर्ण कानूनों में परिवर्तन किया जा सकता है।
पाँचवीं अवस्था में व्यक्ति समझता है कि कानून मानव कल्याण के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अन्यायपूर्ण कानूनों में परिवर्तन किया जा सकता है।
प्रश्न 27. सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेने वाला व्यक्ति किस स्तर पर होता है?
सही उत्तर: (A) उत्तर-परंपरागत स्तर।
छठी अवस्था उत्तर-परंपरागत स्तर का हिस्सा है। इसमें व्यक्ति न्याय, समानता और मानव गरिमा जैसे सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है।
छठी अवस्था उत्तर-परंपरागत स्तर का हिस्सा है। इसमें व्यक्ति न्याय, समानता और मानव गरिमा जैसे सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है।
प्रश्न 28. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
सही उत्तर: (D) अवस्था 5 — सामाजिक अनुबंध एवं व्यक्तिगत अधिकार।
कोहलबर्ग की पाँचवीं अवस्था सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकारों से संबंधित है। अन्य विकल्पों में अवस्थाओं का गलत मिलान किया गया है।
कोहलबर्ग की पाँचवीं अवस्था सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकारों से संबंधित है। अन्य विकल्पों में अवस्थाओं का गलत मिलान किया गया है।
प्रश्न 29. एक शिक्षक विद्यार्थियों के सामने नैतिक दुविधाएँ प्रस्तुत करता है और उनसे अपने निर्णय के कारण बताने को कहता है। यह किस सिद्धांत के अनुरूप शिक्षण रणनीति है?
सही उत्तर: (B) कोहलबर्ग का नैतिक तर्क विकास दृष्टिकोण।
नैतिक दुविधाओं पर चर्चा विद्यार्थियों को विभिन्न दृष्टिकोणों, तर्कों और नैतिक मूल्यों पर विचार करने का अवसर देती है। यह कोहलबर्ग के सिद्धांत के शैक्षिक उपयोग से संबंधित है।
नैतिक दुविधाओं पर चर्चा विद्यार्थियों को विभिन्न दृष्टिकोणों, तर्कों और नैतिक मूल्यों पर विचार करने का अवसर देती है। यह कोहलबर्ग के सिद्धांत के शैक्षिक उपयोग से संबंधित है।
प्रश्न 30. कोहलबर्ग के सिद्धांत के अनुसार नैतिक विकास का उच्चतम स्तर कौन-सा है?
सही उत्तर: (C) उत्तर-परंपरागत स्तर।
उत्तर-परंपरागत स्तर को कोहलबर्ग के सिद्धांत में उच्चतम स्तर माना गया है। इसमें नैतिक निर्णय सामाजिक नियमों से आगे बढ़कर अधिकारों, न्याय और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं।
उत्तर-परंपरागत स्तर को कोहलबर्ग के सिद्धांत में उच्चतम स्तर माना गया है। इसमें नैतिक निर्णय सामाजिक नियमों से आगे बढ़कर अधिकारों, न्याय और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं।
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