विद्यालयी ज्ञान तथा विद्यालय के बाह्य ज्ञान के संप्रत्यय
प्रश्न – विद्यालयी ज्ञान तथा विद्यालय के बाह्य ज्ञान के संप्रत्यय को स्पष्ट करें। M.U B.Ed. 2023
1. भूमिका
शिक्षा के क्षेत्र में ज्ञान को सामान्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है—विद्यालयी ज्ञान और विद्यालय के बाह्य ज्ञान। ये दोनों ज्ञान विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं व्यावहारिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. विद्यालयी ज्ञान (School Knowledge)
विद्यालय में पाठ्यक्रम, पाठ्य-पुस्तकों और शिक्षक के माध्यम से जो ज्ञान दिया जाता है, उसे विद्यालयी ज्ञान कहते हैं। यह ज्ञान संगठित, व्यवस्थित और औपचारिक होता है।
मुख्य विशेषताएँ
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यह पाठ्यक्रम और पाठ्य-पुस्तकों पर आधारित होता है।
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इसे नियोजित और व्यवस्थित तरीके से पढ़ाया जाता है।
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इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान और बौद्धिक विकास प्रदान करना है।
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उदाहरण – गणित, विज्ञान, इतिहास, भाषा आदि विषयों का ज्ञान।
3. विद्यालय के बाह्य ज्ञान (Out-of-school Knowledge)
विद्यालय के बाहर परिवार, समाज, संस्कृति, मीडिया और दैनिक जीवन के अनुभवों से प्राप्त होने वाले ज्ञान को विद्यालय के बाह्य ज्ञान कहा जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
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यह अनौपचारिक और अनुभव आधारित होता है।
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यह परिवार, समाज और जीवन के अनुभवों से प्राप्त होता है।
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यह विद्यार्थियों के व्यावहारिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है।
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उदाहरण – सामाजिक व्यवहार, परंपराएँ, नैतिक मूल्य, जीवन कौशल आदि।
4. विद्यालयी ज्ञान और बाह्य ज्ञान का संबंध
विद्यालयी ज्ञान और बाह्य ज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि शिक्षक विद्यार्थियों के बाह्य अनुभवों को कक्षा के ज्ञान से जोड़ देता है, तो अधिगम अधिक सार्थक और प्रभावी हो जाता है।
5. निष्कर्ष
अतः कहा जा सकता है कि विद्यालयी ज्ञान विद्यार्थियों को सैद्धांतिक और व्यवस्थित ज्ञान देता है, जबकि विद्यालय के बाह्य ज्ञान से उन्हें व्यावहारिक अनुभव और सामाजिक समझ प्राप्त होती है। दोनों के समन्वय से शिक्षा अधिक प्रभावी बनती है।
