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पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत | piyaaje ke sangyaanaatmak siddhaant

पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत


प्रश्न- पियाजे के संज्ञानात्मक सिद्धांत को विस्तर से समझायें -M.U B.Ed. 2023

उत्तर -

भूमिका

पियाजे एक स्विस मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने बालक के संज्ञानात्मक (Cognitive) विकास को वैज्ञानिक आधार पर समझाया। उनके अनुसार बालक ज्ञान का निष्क्रिय ग्रहणकर्ता नहीं होता, बल्कि वह अपने अनुभवों और परिवेश के साथ अंतःक्रिया करके स्वयं ज्ञान का निर्माण करता है। इसे निर्माणवादी दृष्टिकोण (Constructivism) कहा जाता है।

मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts)

  1. स्कीमा (Schema)
    मानसिक संरचना या ढाँचा जिसके माध्यम से बालक नई जानकारी को समझता है।

  2. अभिग्रहण (Assimilation)
    नई जानकारी को पूर्व स्कीमा में समाहित करना।

  3. समायोजन (Accommodation)
    नई जानकारी के अनुसार स्कीमा में परिवर्तन करना।

  4. संतुलन (Equilibration)
    अभिग्रहण और समायोजन के बीच संतुलन स्थापित करना। यही प्रक्रिया बौद्धिक विकास को आगे बढ़ाती है।

संज्ञानात्मक विकास के चार चरण

1. संवेदी-गामक अवस्था (Sensorimotor Stage) — जन्म से 2 वर्ष तक

  • शिशु इन्द्रियों और क्रियाओं के माध्यम से संसार को समझता है।

  • वस्तु स्थायित्व (Object Permanence) का विकास – वस्तु आँखों से ओझल होने पर भी अस्तित्व में रहती है।

2. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage) — 2 से 7 वर्ष

  • प्रतीकों और भाषा का विकास।

  • अहंकेन्द्रिता (Egocentrism) – बालक दूसरों के दृष्टिकोण को समझने में असमर्थ।

  • संरक्षण (Conservation) की अवधारणा का अभाव।

3. ठोस संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage) — 7 से 11 वर्ष

  • तर्कसंगत चिंतन का विकास, परंतु केवल ठोस वस्तुओं तक सीमित।

  • संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण और क्रमबद्धता (Seriation) की क्षमता विकसित।

4. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) — 11 वर्ष से आगे

  • अमूर्त (Abstract) चिंतन और परिकल्पना आधारित तर्क।

  • समस्या समाधान में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रयोग।

शैक्षिक महत्व (Educational Implications)

  1. शिक्षण बालक की आयु और मानसिक स्तर के अनुरूप होना चाहिए।

  2. प्रत्यक्ष अनुभव एवं क्रियात्मक अधिगम (Activity Based Learning) को महत्व देना चाहिए।

  3. ठोस सामग्री (TLM) का प्रयोग विशेषकर प्राथमिक स्तर पर आवश्यक है।

  4. शिक्षक मार्गदर्शक (Facilitator) की भूमिका निभाए।

  5. खोज आधारित शिक्षण (Discovery Learning) को बढ़ावा देना चाहिए।

आलोचना (Criticism)

  • सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारकों की उपेक्षा।

  • सभी बच्चों का विकास एक समान गति से नहीं होता।

  • कुछ शोधों में पाया गया कि बालक कुछ क्षमताएँ अपेक्षित आयु से पहले विकसित कर लेते हैं।

निष्कर्ष

पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत बाल मनोविज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सिद्धांत ने यह स्पष्ट किया कि बालक का बौद्धिक विकास चरणबद्ध होता है तथा शिक्षण प्रक्रिया बालक की मानसिक परिपक्वता के अनुरूप होनी चाहिए। बी.एड. स्तर पर यह सिद्धांत शिक्षण-शिक्षण विधियों को समझने के लिए आधारभूत माना जाता है।

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