लेव वायगोत्स्की जीवनी एवं सिद्धांत
(CTET / TET / B.Ed. / M.Ed. परीक्षा हेतु अत्यंत उपयोगी)
| EXAM NAME | CTET |
| TOPIC | लेव वायगोत्स्की केजीवनी एवं सिधांत |
| EXAM DATE | 8 FEB 2026 |
| OFFICIAL WEBSITE | https://ctet.nic.in/ |
| OTHER WEBSITE | VVI NOTES |
AB JANKARI के इस पेज में CTET EXAM के लिए लेव वायगोत्स्की के जीवनी एवं सिद्धांत से सम्बन्धित जानकारी दिया गया है , जो CTET के परीक्षा में पूछे जा सकते है |
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लेव वायगोत्स्की की जीवनी
Biography of Lev Vygotsky
- पूरा नाम – लेव सेमेनोविच वायगोत्स्की
- जन्म – 17 नवंबर 1896
- जन्म स्थान – ओरशा, बेलारूस (तत्कालीन रूस)
- मृत्यु – 11 जून 1934
- आयु – 37 वर्ष
- राष्ट्रीयता – रूसी
- पेशा – मनोवैज्ञानिक, दार्शनिक, शिक्षाशास्त्री
लेव वायगोत्स्की के शैक्षिक पृष्ठभूमि
- प्रारंभिक शिक्षा घर पर
- मॉस्को विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई
- साथ ही दर्शनशास्त्र, साहित्य, भाषा विज्ञान और मनोविज्ञान में गहरी रुचि
- बाद में बाल मनोविज्ञान और शिक्षा मनोविज्ञान में कार्य
लेव वायगोत्स्की के व्यावसायिक जीवन
- शिक्षक, शोधकर्ता एवं मनोवैज्ञानिक के रूप में कार्य।
- बाल विकास, भाषा, सामाजिक अंतःक्रिया और संस्कृति पर अनुसंधान।
- अल्पायु में निधन के बावजूद शिक्षा-मनोविज्ञान को नई दिशा दी।
लेव वायगोत्स्की के प्रमुख कृतियाँ
- Thought and Language (विचार और भाषा)
- Mind in Society (समाज में मन)
- Educational Psychology
वायगोत्स्की का सिद्धांत
(Vygotsky’s Theory)
वायगोत्स्की का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Sociocultural Theory)
वायगोत्स्की के अनुसार—
बालक का संज्ञानात्मक विकास समाज, संस्कृति, भाषा और सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से होता है।
वे मानते थे कि अधिगम पहले होता है और विकास बाद में।
1. सामाजिक अंतःक्रिया की भूमिका
बालक का संज्ञानात्मक विकास समाज, संस्कृति, भाषा और सामाजिक अंतःक्रिया के माध्यम से होता है।
वे मानते थे कि अधिगम पहले होता है और विकास बाद में।
1. सामाजिक अंतःक्रिया की भूमिका
- बालक अकेले नहीं सीखता
- माता-पिता, शिक्षक, मित्र, समाज सीखने में सहायक होते हैं
- ज्ञान पहले सामाजिक स्तर (Inter-psychological) पर विकसित होता है, फिर व्यक्तिगत स्तर (Intra-psychological) पर
2. भाषा की भूमिका
वायगोत्स्की के अनुसार भाषा केवल संप्रेषण का साधन नहीं, बल्कि सोचने का उपकरण है।
भाषा के तीन रूप
- सामाजिक भाषा – दूसरों से संवाद
- निजी भाषा (Private Speech) – स्वयं से बात करना (आत्म-नियंत्रण हेतु)
- आंतरिक भाषा (Inner Speech) – सोचने की प्रक्रिया
3. समीपस्थ विकास क्षेत्र (Zone of Proximal Development – ZPD)
परिभाषा
ZPD वह अंतर है—
जो बालक स्वतंत्र रूप से कर सकता है और
जो वह किसी सक्षम व्यक्ति की सहायता से कर सकता है।
महत्व
प्रभावी शिक्षण ZPD में होता है
शिक्षक को कठिनाई स्तर का ध्यान रखना चाहिए
ZPD वह अंतर है—
जो बालक स्वतंत्र रूप से कर सकता है और
जो वह किसी सक्षम व्यक्ति की सहायता से कर सकता है।
महत्व
प्रभावी शिक्षण ZPD में होता है
शिक्षक को कठिनाई स्तर का ध्यान रखना चाहिए
4. सहारा प्रदान करना (Scaffolding)
- शिक्षण के दौरान शिक्षक द्वारा दी गई अस्थायी सहायता
- जैसे-जैसे बालक सक्षम होता है, सहायता हटाई जाती है
- इससे आत्मनिर्भरता विकसित होती है
5. लेव वायगोत्स्की के सिद्धांत का संस्कृति की भूमिका
- संस्कृति सोचने के तरीके को प्रभावित करती है
- उपकरण, प्रतीक, भाषा और मूल्य अधिगम को दिशा देते हैं
- विभिन्न संस्कृतियों में सोचने की शैली अलग होती है
6. लेव वायगोत्स्की के सिद्धांत काअधिगम और विकास का संबंध
- वायगोत्स्की पियाजे
- अधिगम → विकास विकास → अधिगम
- सामाजिक कारक महत्वपूर्ण जैविक परिपक्वता महत्वपूर्ण
- भाषा प्रमुख भूमिका भाषा गौण
लेव वायगोत्स्की के सिद्धांत का शैक्षिक महत्व
(Educational Implications)
- सहकारी अधिगम को बढ़ावा देना
- समूह कार्य और चर्चा का प्रयोग
- शिक्षक को मार्गदर्शक की भूमिका
- ZPD के अनुसार पाठ योजना
- भाषा-आधारित शिक्षण पर बल
लेव वायगोत्स्की के सिद्धांत का सीमाएँ
(Limitations)
- जैविक परिपक्वता को कम महत्व
- व्यक्तिगत खोज अधिगम पर कम जोर
- प्रयोगात्मक प्रमाण सीमित
निष्कर्ष
वायगोत्स्की का सिद्धांत बताता है कि सीखना सामाजिक प्रक्रिया है। बालक समाज के साथ अंतःक्रिया करते हुए ज्ञान का निर्माण करता है। आधुनिक रचनावादी शिक्षण इसी सिद्धांत पर आधारित है।
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