कोहलबर्ग के नैतिक विकास MCQ MOCK TEST
कोहलबर्ग के नैतिक विकास MCQ SCORE TEST-03
Kohlberg's Theory of Moral Development-03
MCQ Practice Mock Test – Set 03
कुल प्रश्न: 30 | पूर्णांक: 30 | प्रत्येक प्रश्न: 1 अंक
प्रश्न 1. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास का संबंध मुख्यतः किस मानसिक प्रक्रिया से है?
सही उत्तर: (A) नैतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया।
व्याख्या: कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को व्यक्ति के नैतिक तर्क एवं निर्णय लेने की प्रक्रिया में होने वाले क्रमिक परिवर्तन के रूप में समझाया।
व्याख्या: कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को व्यक्ति के नैतिक तर्क एवं निर्णय लेने की प्रक्रिया में होने वाले क्रमिक परिवर्तन के रूप में समझाया।
प्रश्न 2. कोहलबर्ग ने नैतिक विकास के अध्ययन में किस प्रकार की शोध पद्धति का प्रमुख रूप से उपयोग किया?
सही उत्तर: (B) नैतिक दुविधाओं पर आधारित साक्षात्कार।
व्याख्या: कोहलबर्ग ने व्यक्तियों के सामने नैतिक दुविधाएँ रखकर उनके उत्तरों और तर्कों का विश्लेषण किया।
व्याख्या: कोहलबर्ग ने व्यक्तियों के सामने नैतिक दुविधाएँ रखकर उनके उत्तरों और तर्कों का विश्लेषण किया।
प्रश्न 3. कोहलबर्ग के सिद्धांत में 'नैतिक दुविधा' का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
सही उत्तर: (C) नैतिक तर्क के स्तर को समझना।
व्याख्या: नैतिक दुविधा व्यक्ति को दो या अधिक नैतिक विकल्पों के बीच निर्णय लेने की स्थिति में रखती है। उसके तर्क से नैतिक चिंतन का स्तर समझा जाता है।
व्याख्या: नैतिक दुविधा व्यक्ति को दो या अधिक नैतिक विकल्पों के बीच निर्णय लेने की स्थिति में रखती है। उसके तर्क से नैतिक चिंतन का स्तर समझा जाता है।
प्रश्न 4. कोहलबर्ग के सिद्धांत में नैतिक विकास के चरणों की प्रकृति कैसी मानी गई है?
सही उत्तर: (D) क्रमबद्ध एवं अनुक्रमिक।
व्याख्या: कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक तर्क का विकास सामान्यतः निश्चित क्रम में होता है। व्यक्ति सामान्यतः पहले के चरणों से आगे बढ़कर उच्चतर चरणों की ओर जाता है।
व्याख्या: कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक तर्क का विकास सामान्यतः निश्चित क्रम में होता है। व्यक्ति सामान्यतः पहले के चरणों से आगे बढ़कर उच्चतर चरणों की ओर जाता है।
प्रश्न 5. यदि कोई विद्यार्थी कहता है कि 'मैं नियम इसलिए मानता हूँ क्योंकि शिक्षक मुझे दंड दे सकते हैं', तो यह किस प्रकार का तर्क है?
सही उत्तर: (A) दंड एवं आज्ञापालन अभिविन्यास।
व्याख्या: इस चरण में व्यक्ति अपने व्यवहार का निर्धारण दंड से बचने और अधिकार प्राप्त व्यक्ति की आज्ञा मानने के आधार पर करता है।
व्याख्या: इस चरण में व्यक्ति अपने व्यवहार का निर्धारण दंड से बचने और अधिकार प्राप्त व्यक्ति की आज्ञा मानने के आधार पर करता है।
प्रश्न 6. नैतिक विकास के किस चरण में व्यक्ति दूसरों के साथ निष्पक्ष लेन-देन को महत्त्व देता है?
सही उत्तर: (B) चरण 2।
व्याख्या: चरण 2 को व्यक्तिगत लाभ एवं विनिमय अभिविन्यास कहा जाता है। इसमें व्यक्ति पारस्परिक लाभ और उचित लेन-देन के आधार पर निर्णय लेता है।
व्याख्या: चरण 2 को व्यक्तिगत लाभ एवं विनिमय अभिविन्यास कहा जाता है। इसमें व्यक्ति पारस्परिक लाभ और उचित लेन-देन के आधार पर निर्णय लेता है।
प्रश्न 7. 'अच्छा बच्चा' अभिविन्यास में व्यक्ति किस बात को प्राथमिकता देता है?
सही उत्तर: (C) दूसरों की स्वीकृति प्राप्त करना।
व्याख्या: चरण 3 में व्यक्ति अच्छा व्यवहार इसलिए करता है ताकि परिवार, मित्र और समाज के लोग उसे अच्छा समझें तथा उसकी प्रशंसा करें।
व्याख्या: चरण 3 में व्यक्ति अच्छा व्यवहार इसलिए करता है ताकि परिवार, मित्र और समाज के लोग उसे अच्छा समझें तथा उसकी प्रशंसा करें।
प्रश्न 8. कोहलबर्ग के अनुसार सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून का पालन करना किस चरण की विशेषता है?
सही उत्तर: (D) चरण 4।
व्याख्या: चरण 4 में व्यक्ति कानून, कर्तव्य और सामाजिक संस्थाओं के प्रति उत्तरदायित्व को महत्त्व देता है। इसका उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना है।
व्याख्या: चरण 4 में व्यक्ति कानून, कर्तव्य और सामाजिक संस्थाओं के प्रति उत्तरदायित्व को महत्त्व देता है। इसका उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना है।
प्रश्न 9. सामाजिक अनुबंध अभिविन्यास में कानूनों को किस रूप में देखा जाता है?
सही उत्तर: (C) समाज के हित में बनाए गए परिवर्तनशील नियम।
व्याख्या: चरण 5 में व्यक्ति समझता है कि कानून सामाजिक सहमति और जनकल्याण के लिए बनाए जाते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर उनमें परिवर्तन किया जा सकता है।
व्याख्या: चरण 5 में व्यक्ति समझता है कि कानून सामाजिक सहमति और जनकल्याण के लिए बनाए जाते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर उनमें परिवर्तन किया जा सकता है।
प्रश्न 10. सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के चरण में निर्णय का आधार क्या होता है?
सही उत्तर: (D) अंतरात्मा एवं न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांत।
व्याख्या: चरण 6 में व्यक्ति न्याय, समानता, मानव गरिमा और अंतरात्मा से जुड़े सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है।
व्याख्या: चरण 6 में व्यक्ति न्याय, समानता, मानव गरिमा और अंतरात्मा से जुड़े सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है।
प्रश्न 11. कोहलबर्ग के सिद्धांत में 'नैतिक स्वायत्तता' का निकटतम अर्थ क्या है?
सही उत्तर: (B) अपने विवेक एवं नैतिक सिद्धांतों से निर्णय लेना।
व्याख्या: नैतिक स्वायत्तता में व्यक्ति केवल बाहरी आदेशों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि अपने तर्क और नैतिक विवेक के आधार पर निर्णय करता है।
व्याख्या: नैतिक स्वायत्तता में व्यक्ति केवल बाहरी आदेशों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि अपने तर्क और नैतिक विवेक के आधार पर निर्णय करता है।
प्रश्न 12. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत में 'पूर्व-परंपरागत स्तर' किससे संबंधित है?
सही उत्तर: (C) दंड, आज्ञापालन और व्यक्तिगत लाभ।
व्याख्या: पूर्व-परंपरागत स्तर में नैतिक निर्णय मुख्यतः दंड से बचने और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त करने पर आधारित होते हैं।
व्याख्या: पूर्व-परंपरागत स्तर में नैतिक निर्णय मुख्यतः दंड से बचने और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त करने पर आधारित होते हैं।
प्रश्न 13. परंपरागत नैतिकता में व्यक्ति के व्यवहार को कौन-सा कारक अधिक प्रभावित करता है?
सही उत्तर: (A) सामाजिक अपेक्षाएँ एवं नियम।
व्याख्या: परंपरागत स्तर में व्यक्ति सामाजिक स्वीकृति, कर्तव्य, कानून और सामाजिक व्यवस्था को महत्त्व देता है।
व्याख्या: परंपरागत स्तर में व्यक्ति सामाजिक स्वीकृति, कर्तव्य, कानून और सामाजिक व्यवस्था को महत्त्व देता है।
प्रश्न 14. उत्तर-परंपरागत स्तर की प्रमुख विशेषता क्या है?
सही उत्तर: (D) सामाजिक नियमों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना।
व्याख्या: उत्तर-परंपरागत स्तर पर व्यक्ति कानूनों और सामाजिक नियमों का मूल्यांकन व्यापक नैतिक मूल्यों, अधिकारों तथा न्याय के आधार पर कर सकता है।
व्याख्या: उत्तर-परंपरागत स्तर पर व्यक्ति कानूनों और सामाजिक नियमों का मूल्यांकन व्यापक नैतिक मूल्यों, अधिकारों तथा न्याय के आधार पर कर सकता है।
प्रश्न 15. कोहलबर्ग के सिद्धांत में नैतिक तर्क और नैतिक व्यवहार के संबंध में कौन-सा कथन उचित है?
सही उत्तर: (C) उच्च नैतिक तर्क होने पर भी व्यवहार हमेशा वैसा हो, यह आवश्यक नहीं।
व्याख्या: व्यक्ति किसी नैतिक स्थिति में सही तर्क समझ सकता है, लेकिन वास्तविक व्यवहार पर परिस्थिति, दबाव और व्यक्तिगत हित का प्रभाव पड़ सकता है।
व्याख्या: व्यक्ति किसी नैतिक स्थिति में सही तर्क समझ सकता है, लेकिन वास्तविक व्यवहार पर परिस्थिति, दबाव और व्यक्तिगत हित का प्रभाव पड़ सकता है।
प्रश्न 16. कोहलबर्ग के सिद्धांत की एक प्रमुख आलोचना किस विद्वान ने की?
सही उत्तर: (B) कैरल गिलिगन।
व्याख्या: कैरल गिलिगन ने कोहलबर्ग के सिद्धांत की आलोचना करते हुए नैतिकता में देखभाल, संबंधों और उत्तरदायित्व के महत्त्व पर बल दिया।
व्याख्या: कैरल गिलिगन ने कोहलबर्ग के सिद्धांत की आलोचना करते हुए नैतिकता में देखभाल, संबंधों और उत्तरदायित्व के महत्त्व पर बल दिया।
प्रश्न 17. कैरल गिलिगन ने नैतिक विकास की व्याख्या में किस पक्ष को विशेष महत्त्व दिया?
सही उत्तर: (D) देखभाल एवं संबंधों की नैतिकता।
व्याख्या: गिलिगन ने नैतिक निर्णयों में सहानुभूति, देखभाल, पारस्परिक संबंध और दूसरों के प्रति उत्तरदायित्व को महत्त्वपूर्ण माना।
व्याख्या: गिलिगन ने नैतिक निर्णयों में सहानुभूति, देखभाल, पारस्परिक संबंध और दूसरों के प्रति उत्तरदायित्व को महत्त्वपूर्ण माना।
प्रश्न 18. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कक्षा में कौन-सी गतिविधि उपयोगी है?
सही उत्तर: (A) नैतिक दुविधाओं पर समूह चर्चा।
व्याख्या: नैतिक समस्याओं पर चर्चा से विद्यार्थी अलग-अलग दृष्टिकोण समझते हैं, तर्क प्रस्तुत करते हैं और अपने नैतिक चिंतन का विकास करते हैं।
व्याख्या: नैतिक समस्याओं पर चर्चा से विद्यार्थी अलग-अलग दृष्टिकोण समझते हैं, तर्क प्रस्तुत करते हैं और अपने नैतिक चिंतन का विकास करते हैं।
प्रश्न 19. यदि कोई व्यक्ति कहता है कि 'कानून का पालन इसलिए जरूरी है क्योंकि समाज में व्यवस्था बनी रहनी चाहिए', तो उसका तर्क किस स्तर का है?
सही उत्तर: (C) परंपरागत।
व्याख्या: सामाजिक व्यवस्था और कानून का संरक्षण परंपरागत स्तर के चौथे चरण की प्रमुख विशेषता है।
व्याख्या: सामाजिक व्यवस्था और कानून का संरक्षण परंपरागत स्तर के चौथे चरण की प्रमुख विशेषता है।
प्रश्न 20. कोहलबर्ग के सिद्धांत में नैतिक विकास का उच्चतम प्रस्तावित चरण कौन-सा है?
सही उत्तर: (D) चरण 6।
व्याख्या: कोहलबर्ग के मूल सिद्धांत में छह चरण प्रस्तावित हैं। छठा चरण सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों पर आधारित सर्वोच्च चरण है।
व्याख्या: कोहलबर्ग के मूल सिद्धांत में छह चरण प्रस्तावित हैं। छठा चरण सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों पर आधारित सर्वोच्च चरण है।
प्रश्न 21. कोहलबर्ग के सिद्धांत के अनुसार नैतिक विकास में संज्ञानात्मक विकास की भूमिका क्या है?
सही उत्तर: (B) नैतिक तर्क के विकास के लिए आधार प्रदान करना।
व्याख्या: कोहलबर्ग का सिद्धांत संज्ञानात्मक-विकासात्मक दृष्टिकोण पर आधारित है। तर्क करने की क्षमता नैतिक निर्णय के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
व्याख्या: कोहलबर्ग का सिद्धांत संज्ञानात्मक-विकासात्मक दृष्टिकोण पर आधारित है। तर्क करने की क्षमता नैतिक निर्णय के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 22. कोहलबर्ग के सिद्धांत में 'नैतिक सापेक्षता' का संबंध किस विचार से है?
सही उत्तर: (C) सामाजिक नियमों एवं मूल्यों का संदर्भ के अनुसार मूल्यांकन।
व्याख्या: सामाजिक अनुबंध के चरण में व्यक्ति समझता है कि कानून और नियम समाज की आवश्यकताओं के अनुसार बनाए जाते हैं तथा उनमें संशोधन संभव है।
व्याख्या: सामाजिक अनुबंध के चरण में व्यक्ति समझता है कि कानून और नियम समाज की आवश्यकताओं के अनुसार बनाए जाते हैं तथा उनमें संशोधन संभव है।
प्रश्न 23. एक विद्यार्थी परीक्षा में नकल नहीं करता क्योंकि वह मानता है कि इससे उसकी ईमानदार छवि बनी रहेगी। यह किस चरण का उदाहरण है?
सही उत्तर: (A) चरण 3।
व्याख्या: चरण 3 में व्यक्ति दूसरों की स्वीकृति, प्रशंसा और अच्छी छवि बनाए रखने के लिए नैतिक व्यवहार करता है।
व्याख्या: चरण 3 में व्यक्ति दूसरों की स्वीकृति, प्रशंसा और अच्छी छवि बनाए रखने के लिए नैतिक व्यवहार करता है।
प्रश्न 24. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक निर्णय का मूल्यांकन करते समय किस पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए?
सही उत्तर: (D) निर्णय के पीछे का तर्क।
व्याख्या: कोहलबर्ग के लिए यह अधिक महत्त्वपूर्ण था कि व्यक्ति किसी कार्य को सही या गलत क्यों मानता है, न कि केवल वह कौन-सा उत्तर चुनता है।
व्याख्या: कोहलबर्ग के लिए यह अधिक महत्त्वपूर्ण था कि व्यक्ति किसी कार्य को सही या गलत क्यों मानता है, न कि केवल वह कौन-सा उत्तर चुनता है।
प्रश्न 25. नैतिक विकास के अध्ययन में कोहलबर्ग ने किस प्रसिद्ध दुविधा का उपयोग किया?
सही उत्तर: (B) हीन्ज दुविधा।
व्याख्या: हीन्ज दुविधा में एक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को बचाने के लिए महँगी दवा चुराने पर विचार करता है। इस स्थिति से नैतिक तर्क का विश्लेषण किया जाता है।
व्याख्या: हीन्ज दुविधा में एक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को बचाने के लिए महँगी दवा चुराने पर विचार करता है। इस स्थिति से नैतिक तर्क का विश्लेषण किया जाता है।
प्रश्न 26. कोहलबर्ग के सिद्धांत की एक सीमा यह है कि इसमें किस पक्ष को अपेक्षाकृत कम महत्त्व दिया गया?
सही उत्तर: (C) नैतिक भावनाएँ एवं देखभाल।
व्याख्या: आलोचकों के अनुसार कोहलबर्ग ने नैतिक तर्क पर अधिक बल दिया, जबकि सहानुभूति, देखभाल और भावनात्मक पक्ष को अपेक्षाकृत कम स्थान दिया।
व्याख्या: आलोचकों के अनुसार कोहलबर्ग ने नैतिक तर्क पर अधिक बल दिया, जबकि सहानुभूति, देखभाल और भावनात्मक पक्ष को अपेक्षाकृत कम स्थान दिया।
प्रश्न 27. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत के अनुरूप है?
सही उत्तर: (C) नैतिक विकास का संबंध तर्क क्षमता से है।
व्याख्या: कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को संज्ञानात्मक विकास से जोड़ा। व्यक्ति की तर्क क्षमता में वृद्धि उसके नैतिक निर्णयों को अधिक परिष्कृत बना सकती है।
व्याख्या: कोहलबर्ग ने नैतिक विकास को संज्ञानात्मक विकास से जोड़ा। व्यक्ति की तर्क क्षमता में वृद्धि उसके नैतिक निर्णयों को अधिक परिष्कृत बना सकती है।
प्रश्न 28. यदि कोई व्यक्ति कहता है कि 'अन्यायपूर्ण कानून का विरोध करना चाहिए क्योंकि मानव अधिकार कानून से अधिक महत्त्वपूर्ण हैं', तो यह किस स्तर का उदाहरण है?
सही उत्तर: (D) उत्तर-परंपरागत।
व्याख्या: उत्तर-परंपरागत स्तर में व्यक्ति कानून का मूल्यांकन मानव अधिकारों, न्याय और व्यापक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर करता है।
व्याख्या: उत्तर-परंपरागत स्तर में व्यक्ति कानून का मूल्यांकन मानव अधिकारों, न्याय और व्यापक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर करता है।
प्रश्न 29. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत का शिक्षा में सबसे महत्त्वपूर्ण उपयोग क्या है?
सही उत्तर: (B) विद्यार्थियों में नैतिक चिंतन एवं तर्क क्षमता विकसित करना।
व्याख्या: शिक्षक नैतिक कहानियों, समस्याओं और चर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों को सही-गलत पर स्वतंत्र रूप से विचार करने के अवसर दे सकता है।
व्याख्या: शिक्षक नैतिक कहानियों, समस्याओं और चर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों को सही-गलत पर स्वतंत्र रूप से विचार करने के अवसर दे सकता है।
प्रश्न 30. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास में व्यक्ति का उच्चतर स्तर की ओर बढ़ना मुख्यतः किससे संबंधित है?
सही उत्तर: (C) नैतिक चिंतन एवं तर्क की जटिलता बढ़ने से।
व्याख्या: कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास में व्यक्ति का चिंतन अधिक व्यापक, तार्किक और सिद्धांत आधारित होता जाता है।
व्याख्या: कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास में व्यक्ति का चिंतन अधिक व्यापक, तार्किक और सिद्धांत आधारित होता जाता है।

