LANGUAGE ACROSS THE CURRICULUM SYLLABUS WITH SOLUTION
| UNIVERSITY | MAGADH UNIVERSITY |
| विषय | |
| SUBJECT | LANGUAGE ACROSS THE CURRICULUM |
| COURSE | B.Ed. 1st Year |
| PAPER CODE | C 4 |
MAGADH UNIVERSITY B.Ed. 1ST YEAR C-4 LANGUAGE ACROSS THE CURRICULUM SYLLABUS
UNIT-1: Language and Literary
➤Background of students, Influence in classroom Interaction.
➤Literacy, Oral and Written language used in classroom.
➤Develop Strategies for using oral language for the classroom to promote learning in the subject area..
➤Pedagogical decisions and nature of students learning.
➤Reading comprehension.
➤Background of students, Influence in classroom Interaction.
➤Literacy, Oral and Written language used in classroom.
➤Develop Strategies for using oral language for the classroom to promote learning in the subject area..
➤Pedagogical decisions and nature of students learning.
➤Reading comprehension.
UNIT-2: Language Diversity & Multilingualism
➤The home language and school language. Deficit theory (Eter, 1989). Discontinuity theory.
➤Nature of questioning in the classroom, types of questions.
➤Constitutional Provisions about Language
➤Diversity: In the Context of India
➤Multilingualism as a Resource and a Strategy
UNIT-3: Language across the Curriculum
➤Function of language: in the classroom, outside the class room
➤Language in education and Curriculum
➤Learning language and learning through language
➤Studying state policies on language in education.
➤Relationship of Language and Society: Identity, power and discri-mination.
UNIT-4: Language Classroom
➤Introduction, Aims and Objectives of Language Teaching
➤Current Language Teaching-learning Processes and their Analysis
➤Learning language and learning through language
➤Studying state policies on language in education.
➤Relationship of Language and Society: Identity, power and discri-mination.
UNIT-4: Language Classroom
➤Introduction, Aims and Objectives of Language Teaching
➤Current Language Teaching-learning Processes and their Analysis
➤Organizing Language Classroom
➤Role of the Teacher in language teaching.
UNIT-5: Developing Language Skills
➤Developing Listening and Speaking skills: Dialogue, Storytelling, Poem Recitation, Short play
➤Reading an expository text; strategies; comprehension; activating schema; Building schema; reading to learn.
➤Role of the Teacher in language teaching.
UNIT-5: Developing Language Skills
➤Developing Listening and Speaking skills: Dialogue, Storytelling, Poem Recitation, Short play
➤Reading an expository text; strategies; comprehension; activating schema; Building schema; reading to learn.
➤Beyond the textbook: diverse forms of texts as materials for language.
➤Development Writiing skill and Linkages between reading and writing.
LANGUAGE ACROSS THE CURRICULUM SYLLABUS WITH ANSWER
➤Background of students, Influence in classroom Interaction
➤Literacy, Oral and Written language used in classroom.
➤Develop Strategies for using oral language for the classroom to promote learning in the subject area.
➤Pedagogical decisions and nature of students learning.
➤Reading comprehension.
यूनिट-1: भाषा और साहित्य
➤ छात्रों की पृष्ठभूमि, कक्षा में बातचीत पर प्रभाव
➤ साक्षरता, कक्षा में इस्तेमाल होने वाली मौखिक और लिखित भाषा
➤ विषय क्षेत्र में सीखने को बढ़ावा देने के लिए कक्षा में मौखिक भाषा के इस्तेमाल की रणनीतियाँ बनाना
➤ पढ़ाने-लिखाने से जुड़े फ़ैसले और छात्रों के सीखने का तरीका
➤ पढ़कर समझने की क्षमता (Reading comprehension)
प्रश्न-1 भाषा और साहित्य की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए शिक्षा में उनके महत्व तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनकी भूमिका का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर -
- भूमिका
- भाषा की अवधारणा
- भाषा की विशेषताएँ
- साहित्य की अवधारणा
- साहित्य की विशेषताएँ
- शिक्षा में भाषा का महत्व
- शिक्षा में साहित्य का महत्व
- भाषा और साहित्य विद्यार्थियों के बहुआयामी विकास में महत्वपूर्ण योगदान
- शिक्षक की भूमिका
- निष्कर्ष (Conclusion)
भूमिका (Introduction)
भाषा मानव के विचारों, भावनाओं तथा अनुभवों को व्यक्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है, जबकि साहित्य समाज, संस्कृति और जीवन-मूल्यों का दर्पण माना जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में भाषा और साहित्य का विशेष महत्व है, क्योंकि इनके माध्यम से विद्यार्थियों का बौद्धिक, भावनात्मक, सामाजिक तथा नैतिक विकास होता है। भाषा और साहित्य न केवल ज्ञानार्जन का आधार हैं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और रचनात्मक सोच के भी प्रमुख साधन हैं।
भाषा की अवधारणा (Concept of Language)
भाषा वह माध्यम है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं, अनुभवों एवं ज्ञान का आदान-प्रदान करता है। यह मौखिक, लिखित अथवा सांकेतिक रूप में हो सकती है। भाषा संचार, अधिगम तथा सामाजिक संबंधों का आधार है।
भाषा की विशेषताएँ
- भाषा संचार का प्रभावी माध्यम है।
- यह सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाती है।
- भाषा विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सहायता करती है।
- यह ज्ञान के अर्जन एवं प्रसार का प्रमुख साधन है।
- भाषा समय, स्थान एवं समाज के अनुसार विकसित होती रहती है।
साहित्य की अवधारणा (Concept of Literature)
साहित्य मानव जीवन, समाज, संस्कृति तथा मानवीय संवेदनाओं की कलात्मक अभिव्यक्ति है। इसमें कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, जीवनी आदि विभिन्न विधाएँ सम्मिलित होती हैं। साहित्य व्यक्ति को जीवन के विविध पक्षों से परिचित कराता है तथा उसमें संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का विकास करता है।
साहित्य की विशेषताएँ
- साहित्य समाज का दर्पण होता है।
- यह संस्कृति एवं परंपराओं का संरक्षण करता है।
- साहित्य कल्पनाशक्ति एवं रचनात्मकता का विकास करता है।
- यह नैतिक एवं मानवीय मूल्यों को विकसित करता है।
- साहित्य भाषा को समृद्ध एवं प्रभावशाली बनाता है।
शिक्षा में भाषा का महत्व
भाषा शिक्षा की आधारशिला है। इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं—
- शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को प्रभावी बनाती है।
- विद्यार्थियों में संप्रेषण कौशल का विकास करती है।
- चिंतन, तर्क एवं समस्या-समाधान क्षमता को बढ़ाती है।
- अन्य विषयों के अध्ययन को सरल बनाती है।
- आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति क्षमता का विकास करती है।
शिक्षा में साहित्य का महत्व
साहित्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का विकास करता है।
- संवेदनशीलता एवं सहानुभूति की भावना उत्पन्न करता है।
- कल्पनाशक्ति एवं सृजनात्मकता को बढ़ावा देता है।
- संस्कृति एवं सामाजिक जीवन की समझ विकसित करता है।
- भाषा की शुद्धता एवं सौंदर्यबोध का विकास करता है।
- विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भाषा और साहित्य की भूमिका
भाषा और साहित्य विद्यार्थियों के बहुआयामी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं—
1. बौद्धिक विकास
भाषा एवं साहित्य से सोचने, समझने, विश्लेषण करने तथा निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
2. भावनात्मक विकास
साहित्य विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सहानुभूति, प्रेम, करुणा तथा मानवीय मूल्यों का विकास करता है।
3. सामाजिक विकास
भाषा प्रभावी संचार स्थापित करती है तथा साहित्य सामाजिक संबंधों, सहयोग और सहिष्णुता की भावना विकसित करता है।
4. नैतिक विकास
महापुरुषों के जीवन, प्रेरक कथाओं एवं साहित्यिक रचनाओं से नैतिक मूल्यों, ईमानदारी, सत्य, अनुशासन एवं जिम्मेदारी का विकास होता है।
5. सांस्कृतिक विकास
भाषा एवं साहित्य विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, परंपराओं, लोकजीवन तथा राष्ट्रीय विरासत से जोड़ते हैं।
6. रचनात्मक विकास
कविता, कहानी, नाटक, लेखन एवं वाचन जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति और सृजनात्मक क्षमता को विकसित करती हैं।
7. व्यक्तित्व विकास
भाषा एवं साहित्य आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, प्रभावी अभिव्यक्ति तथा सकारात्मक व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होते हैं।
शिक्षक की भूमिका
भाषा और साहित्य के प्रभावी शिक्षण के लिए शिक्षक को—
- विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से बोलने एवं लिखने के अवसर देने चाहिए।
- कहानी, कविता, नाटक तथा समूह चर्चा जैसी गतिविधियों का उपयोग करना चाहिए।
- विद्यार्थियों की भाषा क्षमता के अनुसार शिक्षण करना चाहिए।
- साहित्यिक पुस्तकों के अध्ययन की आदत विकसित करनी चाहिए।
- कक्षा में सकारात्मक एवं संवादात्मक वातावरण बनाना चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
भाषा और साहित्य शिक्षा के अभिन्न अंग हैं। भाषा ज्ञान, संचार एवं अभिव्यक्ति का माध्यम है, जबकि साहित्य जीवन-मूल्यों, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का संवाहक है। दोनों मिलकर विद्यार्थियों के बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक, नैतिक एवं सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में भाषा और साहित्य का समुचित एवं प्रभावी उपयोग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न-2 छात्रों की पृष्ठभूमि (पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई एवं आर्थिक) का कक्षा में होने वाली बातचीत (Classroom Interaction) पर क्या प्रभाव पड़ता है? उपयुक्त उदाहरणों सहित विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
अथवा -
प्रश्न- विद्यार्थियों की विविध पृष्ठभूमि कक्षा-अंतःक्रिया (Classroom Interaction) को किस प्रकार प्रभावित करती है? विस्तार से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर -
- भूमिका
- छात्रों की पृष्ठभूमि का कक्षा में बातचीत पर प्रभाव
- निष्कर्ष
भूमिका
प्रत्येक छात्र अपने साथ परिवार, समाज, संस्कृति, भाषा तथा आर्थिक स्थिति से जुड़े अनेक अनुभव लेकर विद्यालय आता है। ये अनुभव उसके सोचने, समझने, बोलने, सीखने तथा दूसरों के साथ संवाद करने के तरीके को प्रभावित करते हैं। इसलिए कक्षा में होने वाली बातचीत (Classroom Interaction) केवल शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच संवाद नहीं होती, बल्कि यह विद्यार्थियों की विविध पृष्ठभूमियों से भी प्रभावित होती है। यदि शिक्षक इन विविधताओं को समझकर समावेशी वातावरण तैयार करता है, तो अधिगम अधिक प्रभावी एवं सार्थक बन जाता है।
छात्रों की पृष्ठभूमि का कक्षा में बातचीत (Classroom Interaction) पर प्रभाव
1. पारिवारिक पृष्ठभूमि का प्रभाव
परिवार बच्चे की पहली पाठशाला होता है। परिवार का वातावरण, शिक्षा का स्तर तथा अभिभावकों का व्यवहार बच्चे के आत्मविश्वास और संवाद शैली को प्रभावित करता है।
प्रभाव—
शिक्षित परिवार के बच्चे प्रायः अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते हैं।
सहयोगी परिवार के बच्चे प्रश्न पूछने और चर्चा में भाग लेने से नहीं हिचकते।
जिन बच्चों को घर में बोलने का अवसर कम मिलता है, वे कक्षा में भी कम सक्रिय रहते हैं।
उदाहरण:
यदि माता-पिता घर पर बच्चों से नियमित बातचीत करते हैं, तो बच्चा कक्षा में भी अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है।
2. सामाजिक पृष्ठभूमि का प्रभाव
समाज के रीति-रिवाज, सामाजिक मूल्य तथा सामाजिक अनुभव बच्चों के व्यवहार और सहभागिता को प्रभावित करते हैं।
प्रभाव—
सामाजिक रूप से सक्रिय बच्चे समूह-कार्य में बेहतर भाग लेते हैं।
कुछ बच्चे सामाजिक भेदभाव या संकोच के कारण चर्चा में कम भाग लेते हैं।
समानता एवं सहयोग की भावना वाले समाज से आने वाले बच्चे दूसरों के विचारों का सम्मान करते हैं।
उदाहरण:
यदि किसी बच्चे ने सामाजिक भेदभाव का अनुभव किया है, तो वह कक्षा में अपनी राय व्यक्त करने से झिझक सकता है।
3. सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का प्रभाव
हर बच्चे की संस्कृति अलग होती है। उसकी परंपराएँ, रीति-रिवाज, त्योहार और जीवनशैली उसके दृष्टिकोण को प्रभावित करते हैं।
प्रभाव—
बच्चे अपने सांस्कृतिक अनुभवों के आधार पर उत्तर देते हैं।
विभिन्न संस्कृतियों वाले विद्यार्थियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होता है।
सांस्कृतिक विविधता कक्षा को अधिक समृद्ध और रोचक बनाती है।
उदाहरण:
त्योहारों पर चर्चा के समय अलग-अलग राज्यों या समुदायों के बच्चे अपने-अपने अनुभव साझा करते हैं।
4. भाषाई पृष्ठभूमि का प्रभाव
भाषा संचार का प्रमुख माध्यम है। प्रत्येक विद्यार्थी की मातृभाषा या बोली अलग हो सकती है।
प्रभाव—
मातृभाषा में सीखने वाले बच्चे अधिक सहजता से अपनी बात रखते हैं।
दूसरी भाषा में पढ़ने वाले बच्चों को प्रारंभ में कठिनाई हो सकती है।
बहुभाषी वातावरण बच्चों के भाषा कौशल को विकसित करता है।
उदाहरण:
यदि शिक्षक स्थानीय भाषा का भी उपयोग करता है, तो बच्चे विषय को अधिक आसानी से समझते हैं और चर्चा में सक्रिय होते हैं।
5. आर्थिक पृष्ठभूमि का प्रभाव
आर्थिक स्थिति बच्चों के शैक्षिक अवसरों और आत्मविश्वास को प्रभावित करती है।
प्रभाव—
संसाधन सम्पन्न बच्चों को पुस्तकों, इंटरनेट और अन्य शैक्षिक साधनों का अधिक लाभ मिलता है।
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों में कभी-कभी आत्मविश्वास की कमी दिखाई देती है।
उचित सहयोग मिलने पर सभी बच्चे समान रूप से सीख सकते हैं।
उदाहरण:
जिस बच्चे के पास घर में इंटरनेट और पुस्तकें उपलब्ध हैं, वह परियोजना कार्य में अधिक जानकारी प्रस्तुत कर सकता है।
निष्कर्ष
छात्रों की पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई तथा आर्थिक पृष्ठभूमि कक्षा में होने वाली बातचीत को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। प्रत्येक विद्यार्थी अपने अनुभवों और परिवेश के आधार पर सीखता तथा संवाद करता है। इसलिए शिक्षक का दायित्व है कि वह इन विविधताओं को स्वीकार करते हुए समान अवसर, सम्मान एवं सहयोग पर आधारित समावेशी कक्षा का निर्माण करे। ऐसी कक्षा में प्रत्येक विद्यार्थी न केवल प्रभावी ढंग से सीखता है, बल्कि आत्मविश्वास, सामाजिक संवेदनशीलता और संचार कौशल का भी समुचित विकास करता है।
प्रश्न 3- शिक्षक समावेशी एवं प्रभावी कक्षा-अंतःक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से उपाय अपना सकता है? विस्तार से स्पष्ट कीजिए।”
उत्तर -
- भूमिका
- समावेशी एवं प्रभावी कक्षा-अंतःक्रिया सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक के उपाय
- समावेशी कक्षा-अंतःक्रिया का महत्व
- निष्कर्ष
भूमिका
कक्षा-अंतःक्रिया (Classroom Interaction) शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है। प्रभावी कक्षा-अंतःक्रिया तभी संभव है जब प्रत्येक विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के अपनी बात रखने, प्रश्न पूछने और सीखने का समान अवसर मिले। विद्यार्थियों की पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई एवं आर्थिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षक यदि समावेशी वातावरण का निर्माण करता है, तो अधिगम अधिक सार्थक, सक्रिय एवं प्रभावी बन जाता है।
समावेशी एवं प्रभावी कक्षा-अंतःक्रिया सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक के उपाय
1. सभी विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करना
शिक्षक को जाति, धर्म, लिंग, भाषा, आर्थिक स्थिति या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किए बिना प्रत्येक विद्यार्थी को प्रश्न पूछने, उत्तर देने तथा चर्चा में भाग लेने का अवसर देना चाहिए। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और सहभागिता बढ़ती है।
2. सम्मानपूर्ण एवं सुरक्षित कक्षा वातावरण बनाना
ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जहाँ विद्यार्थी बिना डर या संकोच के अपने विचार व्यक्त कर सकें। शिक्षक को विद्यार्थियों की बात ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए तथा उनके विचारों का सम्मान करना चाहिए।
3. विद्यार्थियों की विविध पृष्ठभूमि का सम्मान करना
प्रत्येक विद्यार्थी अलग सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक परिवेश से आता है। शिक्षक को उनकी भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज और अनुभवों का सम्मान करते हुए उन्हें शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ना चाहिए।
उदाहरण:
त्योहारों या स्थानीय परंपराओं से जुड़े उदाहरण देकर विषय को समझाना।
4. मातृभाषा एवं स्थानीय भाषा का उचित उपयोग करना
शिक्षक को आवश्यकतानुसार विद्यार्थियों की मातृभाषा या स्थानीय भाषा का उपयोग करना चाहिए ताकि सभी विद्यार्थी विषय को आसानी से समझ सकें और चर्चा में सक्रिय भाग ले सकें।
5. समूह कार्य एवं सहयोगात्मक अधिगम को बढ़ावा देना
विभिन्न पृष्ठभूमियों के विद्यार्थियों को छोटे-छोटे समूहों में कार्य करने के अवसर देने चाहिए। इससे सहयोग, सहिष्णुता, नेतृत्व क्षमता एवं संचार कौशल का विकास होता है।
6. प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करना
शिक्षक को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जिसमें विद्यार्थी निःसंकोच प्रश्न पूछ सकें। प्रश्नोत्तर आधारित शिक्षण से जिज्ञासा, आलोचनात्मक चिंतन एवं सक्रिय अधिगम को बढ़ावा मिलता है।
7. गतिविधि-आधारित एवं सहभागी शिक्षण अपनाना
भूमिका-अभिनय (Role Play), परियोजना कार्य (Project Work), वाद-विवाद, चर्चा, खेल तथा प्रयोग जैसी गतिविधियों से सभी विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।
8. व्यक्तिगत भिन्नताओं का ध्यान रखना
प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की गति, रुचि, क्षमता एवं आवश्यकता अलग होती है। शिक्षक को इन व्यक्तिगत भिन्नताओं के अनुसार शिक्षण विधियों एवं गतिविधियों में आवश्यक परिवर्तन करना चाहिए।
9. सकारात्मक प्रतिपुष्टि (Positive Feedback) देना
विद्यार्थियों के सही प्रयासों की प्रशंसा करनी चाहिए तथा त्रुटियों को सुधारात्मक एवं प्रेरणादायक ढंग से बताना चाहिए। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
10. आधुनिक शिक्षण सामग्री एवं आईसीटी का उपयोग करना
चित्र, चार्ट, मॉडल, वीडियो, स्मार्ट बोर्ड तथा अन्य डिजिटल संसाधनों का उपयोग करके शिक्षण को अधिक रोचक, स्पष्ट एवं सहभागी बनाया जा सकता है।
11. आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को सहयोग देना
शिक्षक को ऐसे विद्यार्थियों को अतिरिक्त मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री तथा भावनात्मक सहयोग प्रदान करना चाहिए ताकि वे भी समान रूप से कक्षा-अंतःक्रिया में भाग ले सकें।
12. अभिभावकों एवं समुदाय से सहयोग प्राप्त करना
अभिभावकों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को समझना तथा समुदाय के अनुभवों को शिक्षण से जोड़ना प्रभावी कक्षा-अंतःक्रिया में सहायक होता है।
समावेशी कक्षा-अंतःक्रिया का महत्व
- प्रत्येक विद्यार्थी को समान अवसर प्राप्त होता है।
- आत्मविश्वास एवं संचार कौशल का विकास होता है।
- सहयोग, सहिष्णुता एवं सामाजिक समरसता की भावना विकसित होती है।
- सीखना अधिक सक्रिय, रोचक एवं प्रभावी बनता है।
- आलोचनात्मक एवं रचनात्मक चिंतन का विकास होता है।
- समावेशी शिक्षा एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।
निष्कर्ष
समावेशी एवं प्रभावी कक्षा-अंतःक्रिया का निर्माण शिक्षक की संवेदनशीलता, सकारात्मक दृष्टिकोण तथा उपयुक्त शिक्षण रणनीतियों पर निर्भर करता है। जब शिक्षक सभी विद्यार्थियों को समान अवसर, सम्मान, सहयोग तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है, तब कक्षा सीखने का एक जीवंत, लोकतांत्रिक और प्रेरणादायक वातावरण बन जाती है। ऐसी कक्षा न केवल शैक्षिक उपलब्धि बढ़ाती है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, सामाजिक कौशल और मानवीय मूल्यों का भी समग्र विकास करती है।
UNIT-2: Language Diversity & Multilingualism
➤The home language and school language. Deficit theory (Eter, 1989). Discontinuity theory.
➤Nature of questioning in the classroom, types of questions.
➤Constitutional Provisions about Language
➤Diversity: In the Context of India
➤Multilingualism as a Resource and a Strategy
➤The home language and school language. Deficit theory (Eter, 1989). Discontinuity theory.
➤Nature of questioning in the classroom, types of questions.
➤Constitutional Provisions about Language
➤Diversity: In the Context of India
➤Multilingualism as a Resource and a Strategy
यूनिट-2: भाषाई विविधता और बहुभाषिता
➤ घर की भाषा और स्कूल की भाषा। डेफिसिट थ्योरी (Eter, 1989)। डिस्कंटीन्यूटी थ्योरी।
➤ क्लासरूम में सवाल पूछने का तरीका, सवालों के प्रकार।
➤ भाषा से जुड़े संवैधानिक प्रावधान
➤ विविधता: भारत के संदर्भ में
➤ एक संसाधन और रणनीति के तौर पर बहुभाषिता
UNIT-3: Language across the Curriculum
➤Function of language: in the classroom, outside the class room
➤Function of language: in the classroom, outside the class room
➤Language in education and Curriculum
➤Learning language and learning through language
➤Studying state policies on language in education.
➤Relationship of Language and Society: Identity, power and discri-mination.
➤Learning language and learning through language
➤Studying state policies on language in education.
➤Relationship of Language and Society: Identity, power and discri-mination.
यूनिट-3: करिकुलम (पाठ्यक्रम) में भाषा
➤भाषा का काम: क्लासरूम में और क्लासरूम के बाहर
➤शिक्षा और करिकुलम में भाषा
➤भाषा सीखना और भाषा के ज़रिए सीखना
➤शिक्षा में भाषा से जुड़ी राज्य की नीतियों का अध्ययन
➤भाषा और समाज का संबंध: पहचान, शक्ति और भेदभाव
UNIT-4: Language Classroom
➤Introduction, Aims and Objectives of Language Teaching
➤Current Language Teaching-learning Processes and their Analysis
➤Introduction, Aims and Objectives of Language Teaching
➤Current Language Teaching-learning Processes and their Analysis
➤Organizing Language Classroom
➤Role of the Teacher in language teaching.
➤Role of the Teacher in language teaching.
यूनिट-4: भाषा कक्षा
➤भाषा शिक्षण का परिचय, लक्ष्य और उद्देश्य
➤भाषा शिक्षण-अधिगम की वर्तमान प्रक्रियाएँ और उनका विश्लेषण
➤भाषा कक्षा का आयोजन
➤भाषा शिक्षण में शिक्षक की भूमिका
UNIT-5: Developing Language Skills
➤Developing Listening and Speaking skills: Dialogue, Storytelling, Poem Recitation, Short play
➤Reading an expository text; strategies; comprehension; activating schema; Building schema; reading to learn.
➤Developing Listening and Speaking skills: Dialogue, Storytelling, Poem Recitation, Short play
➤Reading an expository text; strategies; comprehension; activating schema; Building schema; reading to learn.
➤Beyond the textbook: diverse forms of texts as materials for language.
➤Development Writiing skill and Linkages between reading and writing.
यूनिट-5: भाषा कौशल का विकास
➤सुनने और बोलने के कौशल का विकास: बातचीत, कहानी सुनाना, कविता पाठ, छोटा नाटक
➤जानकारी देने वाले टेक्स्ट को पढ़ना; रणनीतियाँ; समझ; स्कीमा को सक्रिय करना; स्कीमा बनाना; सीखने के लिए पढ़ना।
➤पाठ्यपुस्तक से परे: भाषा सीखने के लिए अलग-अलग तरह के टेक्स्ट का इस्तेमाल।
➤लेखन कौशल का विकास और पढ़ने व लिखने के बीच संबंध।

