संवेग की विशेषताएं
Characteristics of Emotions
प्रश्न- संवेग की विशेषता का विस्तार से वर्णन करे ?
उत्तर -भूमिका
मानव जीवन में संवेगों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। संवेग व्यक्ति की मानसिक अवस्था को व्यक्त करते हैं तथा उसके व्यवहार, विचार और निर्णयों को प्रभावित करते हैं। प्रेम, क्रोध, भय, आनंद, घृणा, आश्चर्य आदि संवेगों के प्रमुख उदाहरण हैं। मनोविज्ञान में संवेग को ऐसी जटिल अवस्था माना जाता है जिसमें मानसिक, शारीरिक तथा व्यवहारिक परिवर्तन एक साथ दिखाई देते हैं।
संवेग का अर्थ
Meaning of Emotion संवेग शब्द का शाब्दिक अर्थ है-वेग से युक्त अर्थात् जब व्यक्ति वेगवान होकर कार्य करता है तो उसे संवेग कहते हैं । अंग्रेजी भाषा में संवेग को इमोशन ( Emotion) कहते हैं । 'इ' (E) का अर्थ है-अंदर से तथा 'मोशन' (Motion) का अर्थ है गति | अतः इमोशन का अर्थ है-आन्तरिक भावों को बाहर की ओर गति देना । दसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि संवेग आन्तरिक भावो का बाह्य प्रकाशन है। संवेग वास्तव में भावों का तीव्र होना है।संवेग का परिभाषा
(1) वूडवर्थ के शब्दों में- "संवेग आवेश में आने की स्थिति है।संवेग की प्रमुख विशेषताएँ
1. संवेग जन्मजात एवं सार्वभौमिक होते हैं
कुछ मूलभूत संवेग जैसे भय, क्रोध और प्रसन्नता जन्मजात होते हैं। ये सभी मनुष्यों में किसी न किसी रूप में पाए जाते हैं।
2. संवेग तीव्र मानसिक अवस्था है
संवेग सामान्य भावनाओं की तुलना में अधिक तीव्र होते हैं। इनके प्रभाव में व्यक्ति का व्यवहार अचानक बदल सकता है।
3. संवेग में शारीरिक परिवर्तन होते हैं
संवेगों के समय शरीर में अनेक परिवर्तन दिखाई देते हैं, जैसे हृदय गति का बढ़ना, रक्तचाप में परिवर्तन, पसीना आना, चेहरे का लाल पड़ना या कांपना आदि।
4. संवेग व्यवहार को प्रभावित करते हैं
संवेग व्यक्ति के कार्यों और निर्णयों को प्रभावित करते हैं। क्रोध की अवस्था में व्यक्ति आक्रामक हो सकता है, जबकि प्रसन्नता की अवस्था में सहयोगी और सकारात्मक व्यवहार करता है।
5. संवेग अस्थायी होते हैं
संवेग स्थायी नहीं होते। वे कुछ समय तक प्रभाव डालते हैं और परिस्थितियों के बदलने पर समाप्त हो जाते हैं।
6. संवेगों की अभिव्यक्ति विभिन्न प्रकार से होती है
व्यक्ति अपने संवेगों को चेहरे के हाव-भाव, भाषा, शारीरिक मुद्राओं तथा क्रियाओं के माध्यम से व्यक्त करता है।
7. संवेग व्यक्ति-व्यक्ति में भिन्न होते हैं
एक ही परिस्थिति में अलग-अलग व्यक्तियों की संवेगात्मक प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। यह उनके व्यक्तित्व, अनुभव और वातावरण पर निर्भर करता है।
8. संवेगों का संबंध आवश्यकताओं और उद्देश्यों से होता है
जब व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है तो प्रसन्नता उत्पन्न होती है, जबकि बाधा आने पर निराशा या क्रोध जैसे संवेग उत्पन्न होते हैं।
9. संवेग सीखने और समायोजन को प्रभावित करते हैं
सकारात्मक संवेग सीखने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करते हैं, जबकि नकारात्मक संवेग सीखने में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
10. संवेगों पर नियंत्रण एवं परिष्कार संभव है
शिक्षा, अनुभव और सामाजिक वातावरण के माध्यम से व्यक्ति अपने संवेगों को नियंत्रित और परिष्कृत करना सीख सकता है।
11. संवेगों की व्यापकता
Universality of Emotionsसंवेग सभी प्राणियों में पाए जाते हैं। मानव हो अथवा पशु-पक्षी, बालक हो अथवा वृद्ध, सभी भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न संवेगों को प्रदर्शित करते हैं। सभी देशों के निवासियों में संवेग पाए जाते हैं।
12. शारीरिक परिवर्तन
Bodily Changes13. विचार प्रकिर्या का का लोप हो जाना
Not Functioning of Thinking Process सांवेगिक दशा में व्यक्ति की विचार प्रक्रिया लुप्त हो जाती है। बुद्धि तथा विवेक का उसके व्यवहार पर नियंत्रण नहीं रहता है। वह उचित-अनुचित का विचार नही कर पाता है। यही कारण है कि व्यक्ति संवेगों के वशीभूत होकर अनेक ऐसे कार्य कर जाता है , जो वह सामान्य दशा में करना कदापि पसन्द नहीं करता है।14. व्यक्तिगतता
(Individuality) संवेगों की अभिव्यक्ति से व्यक्तिगतता होती है। एक ही स्थिति में भिन्न-भिन्न व्यक्तियों के भिन्न-भिन्न संवेग हो सकती है । जैसे किसी गरीब बच्चे को भीषण शीत में ठिठुरता देखकर उसे पहनने के लिए पुराने कपड़े दयावश दे देता है, जबकि अन्य कोई व्यक्ति स्थिति पर हँस सकता है । इसी प्रकार से पुत्र के शैतानी करने पर किसी पिता को क्रोध आ सकता है,जबकि किसी अन्य पिता के चेहरे पर मन्द मुस्कान तिरोहित हो सकती है।15. संवेगों की अस्थिरता
Instability of Emotions संवेगों की प्रकृति अस्थायी (Temporary) होती है। संवेग थोड़े समय तक रहते हैं, फिर व्यक्ति सामान्य स्थिति में आ जाता है । क्रोध की मनोदशा में माँ अपने बच्चों को डाँटती है, परंतु थोडी देर बाद ही वह सामान्य हो जाती है। इसी प्रकार से करूणा, घृणा, भय, आश्चर्य, कामुकता आदि संवेग कुछ समय के उपरान्त शान्त हो जाते हैं।16. संवेगों का स्थानान्तरण
Transfer of Emotions17.मूल प्रवृत्तियों से सम्बन्ध
Relations with Instincts18. संवेगों की क्रियात्मक प्रवृत्ति
Conative Tendency in Emotions19.सुख-दुख का भाव निहित होना
Inclusion of the Feeling of Pleasure or Painनिष्कर्ष
संवेग मानव व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष हैं। ये व्यक्ति के व्यवहार, सीखने की प्रक्रिया, सामाजिक संबंधों तथा समायोजन को प्रभावित करते हैं। इसलिए शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए संवेगों की प्रकृति एवं विशेषताओं का ज्ञान आवश्यक है, ताकि व्यक्तित्व का संतुलित एवं समग्र विकास किया जा सके।
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BIHAR D.El.Ed 2nd YEAR All Subject Notes
Code | D.El.Ed. 2nd YEAR (Subject) NAME | Notes Link |
S1 | समकालीन भारतीय समाज में शिक्षा | |
Paper S2 | संज्ञान सीखना और बाल विकास | |
S3 | कार्य और शिक्षा | |
S4 | स्वयं की समझ |
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S5 | विद्यालय में स्वास्थ्य योग एवं शारीरिक शिक्षा | |
S6 | Pedagogy of English (Primary Level) | |
S7 | गणित का शिक्षणशास्त्र – 2 (प्राथमिक स्तर) | |
S8 |
हिंदी का शिक्षणशास्त्र – 2 (प्राथमिक स्तर) |
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S9 A | गणित का शिक्षणशास्त्र (उच्च-प्राथमिक स्तर) | Clik Here |
S9 B | विज्ञान का शिक्षणशास्त्र (उच्च-प्राथमिक स्तर) | Clik Here |
S9 C | सामाजिक विज्ञान का शिक्षणशास्त्र (उच्च-प्राथमिक स्तर) | Clik Here |
S9 D | Pedagogy of English (Upper – Primary Level) | Clik Here |
S9 E | हिंदी का शिक्षण शास्त्र (उच्च-प्राथमिक स्तर) | Clik Here |
S9 F | संस्कृत का शिक्षणशास्त्र (उच्च-प्राथमिक स्तर) | Clik Here |
S9 G | मैथिली का शिक्षणशास्त्र (उच्च-प्राथमिक स्तर) | Clik Here |
S9 H | बांग्ला का शिक्षणशास्त्र (उच्च-प्राथमिक स्तर)
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S9 | उर्दू का शिक्षणशास्त्र (उच्च-प्राथमिक स्तर) | Clik Here |

